शिक्षा विभाग लापरवाही और निकम्मेपन का ठिकाना बनता जा रहा है। राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (रमसा) विद्यालयों के शिक्षकों की तनख्वाह केंद्र की ओर से वहन करने के बावजूद विभाग यहां नियुक्ति भी नहीं कर रहा है।
रमसा के करीब 56 फीसदी स्कूलों में शिक्षक नहीं है। ऐसे में यहां के हजारों छात्र बगैर शिक्षक बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी करने को मजबूर हैं। शिक्षक-कर्मचारियों की नियुक्ति हो या स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं जुटाने का काम, अक्सर बजट का रोना रोने वाला शिक्षा विभाग नियुक्ति के मामले में भी फिसड्डी साबित हुआ है।
रमसा के तहत प्रदेश में 271 जूनियर हाईस्कूल, हाईस्कूल में उच्चीकृत हुए। इसमें कुल 682 शिक्षकों की इधर उधर से व्यवस्था की गई है। बाकी विद्यालय बगैर शिक्षक चल रहे हैं।
यह हाल तब है, जब इन स्कूलों के शिक्षकों की 75 फीसदी तनख्वाह केंद्र सरकार वहन करती है। इसके बावजूद विभाग नियुक्ति के लिए गंभीर नहीं है। इन स्कूलों में कुछ वर्ष 2009-10 से तो कुछ 2013 से चल रहे हैं।
ऐसे कैसे सुधरेगा रिजल्ट
मुख्यमंत्री शिक्षकों को नसीहत दे रहे हैं कि स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारी जाए। 15-20 फीसदी रिजल्ट भी सुधरता है तो वह शिक्षकों की मांगों पर अमल करेंगे। मगर बगैर शिक्षक परिणाम कैसे सुधरेंगे, इसका जवाब किसी के पास नहीं है।
कब कितने विद्यालय हुए अपग्रेड
वर्ष - स्कूल
2009-10 - 23
2010-11 - 58
2011-12 - 147
2013-14 - 43
बजट के लोभ में कहा, मार्च तक नियुक्ति तय
रमसा के विद्यालयों में नियुक्ति के बजाए शिक्षा विभाग केंद्र सरकार को भी गुमराह कर रहा है। बजट में कटौती न हो, इसके लिए विभाग से हाल में केंद्र को पत्र लिखकर कहा गया है कि मार्च तक सभी स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति हो जाएगी।
भर्ती परीक्षा की तारीख तक तय नहीं
प्राविधिक शिक्षा परिषद सचिव हरि सिंह के मुताबिक अभी एलटी शिक्षकों की भर्ती परीक्षा की तिथि तय नहीं है। शासन से परीक्षा के लिए पैसा नहीं मिला है। रकम मिलने के बाद ही परीक्षा होगी।
एलटी में प्राविधिक शिक्षा परिषद को नियुक्ति करनी है, कोई और ऐसी संस्था नहीं है जो भर्ती कर सके, शासन तो वर्षो पूर्व अपनी और से भर्ती के लिए अधियाचन कर चुका है भर्ती तो परिषद को ही करनी हैं, यह संभावना है कि परिषद मार्च में परीक्षा करने जा रहा है।
- एमसी जोशी शिक्षा सचिव