भारतीय सेना की रीढ़ और अपनी बहादुरी के किस्सों के दुनियाभर में मशहूर गोरखा लड़ाके अब देश की सेना करने को तैयार नहीं हैं। दुश्मन के छक्के छुड़ा देने वाले यह वीर अब युद्घ के मैदान में उतरने से कतरा रहे हैं।
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कभी जिनकी वीरता और हिम्मत के चर्चे अंग्रेजी हुकूमत के दिल में डर पैदा करते थे वह अब भर्ती रैली स्थल तक आने को तैयार नहीं हैं। विश्वयुद्ध में ईस्ट एशिया से लेकर वेस्ट यूरोप तक नाप चुके यह रण बांकुरे आज एक मील का चक्कर काटने में हांफने लगे हैं।
ऐसे में 7 गोरखा रेजिमेंट्स की 39 बटालियनों में रिक्त पदों के लिए नए जवान नहीं मिलने से सेना की चिंताएं बढ़ गई है। गोरखा जवानों की भर्ती के लिए देश के बड़े केंद्र उत्तराखंड से भी सेना को गोरखा रिक्रूट नहीं मिल रहे।
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771 युवाओं में से मेडिकल में पहुंचे केवल 64
चार माह में दूसरी बार सेना ने उत्तराखंड में गोरखाओं को सेना में भर्ती करने के लिए रैली की, लेकिन वह कामयाब नहीं रही।
गढ़ी कैंट में गढ़वाल मंडल के लिए हुई भर्ती रैली में सेना ने गोरखा युवाओं के लिए अन्य युवाओं से अलग सारी प्रक्रिया आयोजित की। इसके लिए 771 युवा पहुंचे, लेकिन 64 मेडिकल तक पहुंचे।
यह हाल तब है जब उनकी प्रतिस्पर्धा अन्य युवाओं से नहीं थी और कुछ रियायत भी बरती गई। इससे पहले जुलाई में उत्तराखंड और यूपी राज्य की गोरखा भर्ती में ग्राउंड ड्यूटी के लिए पांच फीसदी सफलता दर रही।
ऐसे में सेना की 34 बटालियनों में नए जवानों की जरूरत का पचास फीसदी ही पूरा हो पा रहा है। सैन्य भर्ती अधिकारी कर्नल बीएमएस तलवार ने बताया कि गोरखा युवाओं की कम संख्या के साथ कमजोर प्रदर्शन रहा है। सेना को अधिक गोरखा जवानों की जरूरत है।
सेना में हैं 35 हजार गोरखा
भारतीय सेना में 1, 3, 4, 5, 8 और 11 गोरखा रेजिमेंट की 39 बटालियनें हैं। एक बटालियन में औसतन नौ सौ जवान होते हैं। इन बटालियनों के लिए प्रतिवर्ष 300 से अधिक गोरखा जवानों की जरूरत है, जिसके लिए सर्वाधिक देहरादून फिर धर्मशाला (हिमाचल प्रदेश) और दार्जलिंग (पश्चिम बंगाल) पर सेना निर्भर है।
इसके अलावा नेपाल में होने वाली भर्ती हर समय बनी रहने वाली संशय की स्थिति ने सेना की मश्किलें और बढ़ा दी हैं।
सिखों का भी घटा है सेना में रूझान गोरखाओं के अलावा सिख लड़ाकों की संख्या पूरी करने में सेना सफल नहीं हो रही है। सिख रेजिमेंटों में जितनी संख्या सेना को चाहिए उसका 70 फीसदी ही मिल रहा है।
सेना ने पंजाब के इतर अन्य राज्यों में होने वाली भर्ती में सिखों के लिए अलग से चयन प्रक्रिया के आदेश दिए हैं, लेकिन उसमें भी सफलता नहीं मिल रही। गढ़वाल मंडल में 205 सिख रैली के लिए पहुंचे जिसमें 15 चयनित हुए।
गोरखा नेपाल के लोग हैं और उन्हें ये नाम हिंदू योद्धा संत श्री गुरु गोरखनाथ से मिला है। गोरखा जिला नेपाल में है।
गोरखाली लोग अपने साहस और हिम्मत के लिए जाने जाते हैं। इन्हें नेपाली आर्मी, भारतीय सेना के गोरखा रेजिमेंट और ब्रिटिश आर्मी के गोरखा ब्रिगेज के लिए जाना जाता है। गोरखालियों को ब्रिटिश भारत के अधिकारियों ने मार्शल रेस की उपाधि दी थी।
उनके अनुसार गोरखाली प्राकृतिक रुप से ही योद्धा होते हैं और युद्ध में आक्रामक होते हैं, वफादारी और साहस का गुण रखते हैं, आत्म निर्भर होते हैं, भौतिक रुप से मजबूत, फुर्तीले, सुव्यवस्थित होते हैं। ये लम्बे समय तक कड़ी मेहनत करने वाले, हठी लड़ाकू, मिलेट्री रणनीतिक होते हैं।