भागीरथी मास्टर जोनल प्लान खारिज करने के खिलाफ मुख्यमंत्री हरीश रावत के पांच जनवरी को प्रस्तावित सत्याग्रह पर मातृसदन ने सवाल उठाए हैं। साथ ही सीएम से पूछा है कि केंद्रीय वन पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की सिफारिश पर स्वतंत्र कमेटी आखिर क्यों न बनाई जाए।
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मातृसदन में पत्रकारों से वार्ता करते हुए परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद ने कहा कि 21 अगस्त वर्ष 2010 को प्रो. जीडी अग्रवाल (सन्यास लेने के बाद स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद) के अनशन के दौरान तत्कालीन केंद्रीय पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ही लोहारी नागपाला, पाला भनेरी व भैरोघाटी जल विद्युत परियोजनाओं पर रोक लगाने का पत्र लेकर मातृ सदन पहुंचे थे।
इसी कड़ी में वर्ष 2012 में गोमुख से उत्तरकाशी तक इको सेंसिटिव जोन घोषित किया गया था। दो साल बाद भी इसका मास्टर प्लान तैयार न होने पर उत्तरकाशी निवासी केसर सिंह ने एनजीटी में अपील की।
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स्वतंत्र कमेटी से जांच कराने की मांग
स्वामी शिवानंद
- फोटो : अमर उजाला
एनजीटी की फटकार लगने पर पिछले महीने दिसंबर में सरकार ने आनन फानन में मास्टर जोनल प्लान बनाकर एनजीटी में दाखिल किया। जिसमें पक्षकार केंद्रीय वन पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने बिंदुवार खंडन करते हुए खारिज कर दिया है।
मंत्रालय ने अपनी रिपोर्ट में साफ किया है कि प्लान में मौलिक अध्ययन का अभाव है। साथ ही इको सेंसिटिव सहित गाइड लाइन का भी पालन नहीं किया गया है। एमओएफ ने वन, नदी, पर्यावरण जैसे तमाम विषय विशेषज्ञों की स्वतंत्र कमेटी का गठन कर दोबारा से अध्ययन कर प्लान बनाने को कहा है।
स्वामी शिवानंद ने आरोप लगाया कि मास्टर प्लान धरातल के बजाय एसी कमरों में बैठकर तैयार किया गया है। उन्होंने पूछा कि मुख्यमंत्री बताएं कि स्वतंत्र कमेटी बनाने में उन्हें क्या दिक्कत है। इससे पहले स्वामी शिवानंद ने कहा कि सत्याग्रह में निष्ठा दिखाने पर वह मुख्यमंत्री का स्वागत करते हैं, लेकिन यह भी याद दिलाना चाहते हैं कि सत्याग्रह सच के लिए किया जाता है, न की असत्य के लिए।
मातृसदन एक बार फिर मुख्यमंत्री हरीश रावत पर हमलावर हो गया है। स्वामी शिवानंद ने कहा कि इस मामले में वह सोनिया गांधी और राहुल गांधी को चिट्ठी भेजकर बताएंगे कि जलविद्युत परियोजनाएं बंद करने का फैसला केंद्र की तत्कालीन यूपीए सरकार में लिया गया था।
हरीश रावत खुद उस समय सरकार में मंत्री थे। ऐसे में अब मुख्यमंत्री बनने पर उन्हें क्या दिक्कत महसूस होने लगी है। स्वामी शिवानंद ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड में कांग्रेस को खत्म कर दिया है। अब सोनिया राहुल से पूछा जाएगा कि गंगा के लिए प्रतिबद्ध रहने वाली कांग्रेस क्या गंगा द्रोही हो गई है।
जोनल मास्टर प्लान पर फैलाया जा रहा भ्रम
स्वामी शिवानंद ने कहा कि जोनल मास्टर प्लान को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है कि इसके लागू होने पर लोग अपना घर नहीं बना पाएंगे। जबकि ऐसा नहीं है। स्वामी शिवानंद ने रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि घर बनाने, कुटीर उद्योग, घास काटने, पशु चराने, जैविक खेती, भ्रमण, पर्यटन आदि पर कोई रोक नहीं है। केवल होटल रिजार्ट बनाने, पेड़ काटने, चीड़ के पेड़ लगाने और बोरिंग करने के लिए अनुमति लेनी होगी। इनमें ज्यादा कार्योें के लिए बाकी जगहों पर भी अनुमति लेनी होती है।