उत्तराखंड के 3300 शिक्षामित्रों की 14 साल पुरानी मांग पूरी हो गई है। शासन की मंजूरी के बाद शिक्षा निदेशक सीमा जौनसारी ने 3300 शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक में समायोजित करने के आदेश जारी कर दिए।
इनमें से 2374 वे हैं, जो वर्ष 2001 में शिक्षा आचार्य से शिक्षामित्र बनाए गए थे। 14 साल बाद इन शिक्षामित्रों का अध्यापक बनने का सपना पूरा हुआ है। प्रदेश में 2001 में 2374 शिक्षा आचार्यों को शिक्षामित्र के रूप में समायोजित किया गया था।
926 शिक्षामित्र पहले से विभिन्न स्कूलों में कार्यरत थे। लंबे समय से ये शिक्षामित्र प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक के तौर पर समायोजन की मांग पर आंदोलन कर रहे थे।
प्रदेश सरकार ने समायोजन के लिए 2374 शिक्षामित्रों को इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) से दो वर्षीय डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन (डीएलएड), जबकि बाकी को बीटीसी करवाई गई।
मानव संसाधन विकास मंत्रालय और राष्ट्रीय शिक्षण शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने अध्यापन अनुभव के चलते शिक्षामित्रों को शिक्षण योग्यता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता से मुक्त रखा था।
ढाई गुना होगा वेतन
इस बीच 17 फरवरी 2014 को टीईटी उत्तीर्ण अभ्यर्थियों ने नैनीताल उच्च न्यायालय में अपील कर इस निर्णय पर आपत्ति जताई। इस पर उच्च न्यायालय ने नियुक्ति प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी।
प्रदेश सरकार ने दोहरी बेंच में अपील की, जिसके बाद 18 दिसंबर को अदालत ने नियुक्ति देने का आदेश दे दिया। शासन की मंजूरी के बाद बुधवार को शिक्षा निदेशक ने सभी 3300 शिक्षामित्रों की नियुक्ति का आदेश जारी कर दिया।
शिक्षामित्रों को अभी 13 हजार रुपए मासिक मानदेय दिया जाता है। ये सभी शिक्षामित्र उसी स्कूल में सहायक अध्यापक बन जाएंगे, जहां अभी पढ़ा रहे हैं। सहायक अध्यापक बनते ही इनका मासिक वेतन करीब ढाई गुना बढ़कर 30 से 32 हजार रुपए हो जाएगा।
14 साल बाद सपना पूरा हुआ है। हमने लंबा संघर्ष किया, सात बार पुलिस की लाठियां खाई। कई शिक्षामित्र चोटिल हुए, लेकिन अब हम सहायक अध्यापक बनेंगे।
- ललित द्विवेदी, प्रदेश अध्यक्ष, शिक्षामित्र संगठन
अदालत के आदेश के बाद शिक्षामित्रों और बीटीसी प्रशिक्षितों को सहायक अध्यापक के पद पर समायोजन के समस्त मुख्य शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
- सीमा जौनसारी, शिक्षा निदेशक बेसिक