तीन तलाक के खिलाफ महिलाओं के हक के लिए सबसे पहले याचिका दायर कर सामने आने वाली सायरा का दर्द आज भी कम नहीं हुआ है। पांच बार अबॉर्शन कराने के बाद भी सायरा के पति रिजवान का दिल नहीं पसीजा था। कोर्ट का फैसला आया तो पिता की आंखे भी नम हो गई।
काशीपुर की सायरा बानो ने एक चिट्टी के जरिए पति के तीन तलाक के खिलाफ जब मोर्चा खोला था, तो एक बार को तो पूरा जमाना ही खिलाफ हो गया। लेकिन उसने हार नहीं मानी और मंगलवार को आए सुप्रीमकोर्ट के फैसले में इसे अमान्य करार दे दिया। फैसला आने के बाद भावुक हुए सायरा के पिता ने इसे एतिहासिक फैसला बताते हुए कहा कि बच्ची ने बहुत सहा है। इस फैसले से शायद उसके गम की भरपाई हो जाए।
इलाहाबाद के मूल निवासी सायरा के पिता आरटीसी हेमपुर डिपों के लेखा विभाग में क्लर्क के पद पर कार्यरत है। पांच भाई-बहनों में सबसे बड़ी सायरा ने सोशल साइंस से एमए किया है। सायरा का विवाह 11 अप्रैल 2002 को इलाहाबाद के थाना करेली वीआईपी कालोनी निवासी रिजवान पुत्र इकबाल से हुआ था।