रुड़की के नजदीक ढंडेरा स्टेशन पर सहूलियतों की मांग कर रहे आंदोलनकारियों ने सोमवार को रेल ट्रैक जाम कर दिया। इस वजह से दिल्ली से देहरादून आ रही शताब्दी एक्सप्रेस और सहारनपुर एक्सप्रेस को तकरीबन डेढ़ घंटा रुकना पड़ा।
पुलिस से नोंकझोंक
इस दौरान आंदोलनकारियों की पुलिस से कई बार नोंकझोंक भी हुई। बाद में पुलिस ने सख्ती दिखाते हुए रेल ट्रैक खाली कराया। इसके बाद ट्रेनें रवाना की जा सकीं। शाम को जीआरपी ने आठ आंदोलनकारियों के खिलाफ नामजद और अन्य के खिलाफ ट्रैक रोकने का मुकदमा दर्ज कराया।
उधर, सहूलियतों की मांग को लेकर 30 दिनों से क्रमिक अनशन कर रही उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी संघर्ष समिति ने 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कहा अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे अनिश्चितकाल के लिए रेल ट्रैक जाम कर देंगे।
उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी समिति ने बीते साल दिसंबर में भी रेल ट्रैक को जाम कर विरोध जताया था। एसडीएम और रेलवे अफसरों से बातचीत भी हुई लेकिन बेनतीजा रही। इसके बाद समिति से जुड़े लोग क्रमिक अनशन कर रहे थे।
पुलिस काबू नहीं कर पाई
सोमवार को प्रदर्शनकारी नारेबाजी करते हुए रेल ट्रैक पर पहुंच गए। सबसे आगे महिलाएं चल रही थीं। महिला पुलिस भी उन्हें काबू नहीं कर पाई। प्रदर्शनकारी महिलाएं रेल ट्रैक पर जाकर बैठ गई। उन्होंने दिल्ली से देहरादून आ रही शताब्दी एक्सप्रेस को 11 बजकर 10 मिनट से लेकर 12 बजकर 35 मिनट तक रोके रखा।
इसी दौरान वहां लखनऊ-चंडीगढ़ एक्सप्रेस ट्रेन भी आई उसे भी नहीं जाने दिया। दोनों ट्रेनों के आगे ट्रैक को कब्जाकर आंदोलनकारी नारेबाजी करते रहे। हंगामे की सूचना पाकर एसपी देहात अजय सिंह और सीओ जेबी पांडेय की अगुवाई में प्रदर्शनकारियों को ट्रैक से हटाकर मार्ग को सुचारु किया।
उधर, समिति के अध्यक्ष हर्षप्रकाश काला का कहना है कि यदि 24 घंटे की अवधि में उनकी मांगें स्वीकार नहीं हुई तो अनिश्चितकाल के लिए रेलवे ट्रैक जाम कर दिया जाएगा।
आंदोलनकारियों में सुनीता रावत, नंदी देवी रावत, सरोज बडथ्वाल, राजबाला, भगवती, रेणु, राधा देवी, उमा कठैत, गीता विष्ट, मनोरमा देवी, पार्वती रावत, उषा गुंसाई, अमिता रावत, कृष्णा, मधु रावत, बीएस पांडेय, राधा कृष्ण पुरोहित, राजेश थपलियाल, कुंवर सिंह, राजेन्द्र काला आदि शामिल थे।