महिलाओं ने जब भी अपने ज्ञान और इच्छाशक्ति का उपयोग किया है, वह हमेशा परिवार के साथ-साथ दूसरों के लिए भी 'शक्ति' बनकर सामने आई हैं। नवरात्र के अवसर पर अमर उजाला अपने पाठकों को उन 'शक्तियों' से परिचित करा रहा है, जिन्होंने राज्य में अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी ताकत से एक अलग मुकाम बनाया है।
कोई निशुल्क इलाज कर रहा है, तो कोई गरीब बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी उठा रखी है। कोई संस्कृति से लोगों को रूबरू करा रहा है तो कोई पेड़ों को ही औलाद मान रहा है। आज छठवें दिन पढ़िए ऐसी ही नौ महिलाओं की कहानी, जो समाज में अलग स्थान रखती हैं।
देहरादून: दांत का निशुल्क इलाज कर जबड़े लगा रहीं डॉ. योगेश्वरी
दून अस्पताल के दंत रोग विभाग में कार्यरत डॉ. योगेश्वरी कृष्णन नेशनल मेडिकोज ऑर्गेनाइजेशन से जुड़ी हैं। इसके माध्यम से वह मरीजों के दांत का निशुल्क इलाज करती हैं। योगेश्वरी ने बताया कि उनकी मां मनोरोग चिकित्सक हैं। वह मां को इलाज करते देख डॉक्टर बनीं। वह दून अस्पताल से बचे समय में अपनी टीम के साथ पहाड़ी इलाकों, स्कूलों, आश्रमों में जाती हैं और शिविर लगाकर दांत का इलाज करती हैं। दांत के इलाज के लिए वह अब तक 69 कैंप लगा चुकी हैं। गत दिनों तीन दिन के कैंप में 80 मरीजों को जबड़े बनाकर लगाए हैं। इनमें आंशिक और पूरे मुंह के जबड़े शामिल हैं। उनकी टीम जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में भी दांत का निशुल्क इलाज कर चुकी है। उन्होंने कोविड में ब्लैक फंगस के मरीजों को एम्स ऋषिकेश में भी मुफ्त कृत्रिम अंग दिया था।
देहरादून: कार्टून से उत्तराखंड की संस्कृति से रूबरू करा रही लाटी
लाटी किरदार से लोगों के बीच चर्चाओं में आई कंचन जदली अपने कार्टून से लोगों को उत्तराखंड की संस्कृति से रूबरू करा रही हैं। मूल रूप से कोटद्वार निवासी कंचन पहाड़ी कार्टून, चित्रों और गुदगुदाती पंचलाइन से लोगों को अपनी बोली भाषा से जुड़े रहने के लिए प्रेरित कर रही हैं। कंचन ने अपने डिजिटल आर्ट के जरिए प्रवासियों को उत्तराखंड से जोड़ने का काम किया है। लाटी के कार्टून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने सोशल मीडिया पर साझा किया था। कंचन अपने कार्टून के जरिए उत्तराखंड में भू-कानून लागू करने की मांग उठाने के साथ यहां के तीज-त्योहारों के प्रति लोगों को जागरूक करती हैं। जबकि वह उत्तराखंड के खानपान, वेशभूषा, लोक पर्व समेत प्रदेश की संस्कृति से जुड़े कई कार्टून बना चुकी हैं।