देहरादून: जरूरतमंद बच्चों की मदद के लिए मधु ने बढ़ाया हाथ
उत्तराखंड राज्य बाल कल्याण परिषद में अवैतनिक उपाध्यक्ष के पद पर कार्यरत मधु बेरी ने जरूरतमंद बच्चों की मदद के लिए हाथ बढ़ाया है। रायपुर ब्लॉक के छात्र अंकित और अमित सड़क हादसे में घायल हो गए थे। मधु ने उनके इलाज में आर्थिक मदद की। जबकि बुरांसखंडा में एक छात्र के पिता को गैंगरीन होने पर भी मधु ने आर्थिक सहायता के लिए हाथ बढ़ाया। जो अब स्वस्थ हैं और अपना व्यवसाय कर रहे हैं। रायपुर ब्लॉक की ग्राम सभा सिल्ला में एक छात्रा का मकान क्षतिग्रस्त होने पर भी उन्होंने राहत राशि पहुंचाई। जो भारतीय बाल कल्याण परिषद नई दिल्ली में भी अपना योगदान दे रही हैं। इस तरह के अनेक मामले हैं, जब मधु बेरी ने अपनी सूझबूझ से लोगों की मदद की और उन्हें आगे बढ़ाया। यही नहीं उनके प्रयास से कई लोग अलग-अलग क्षेत्रों में अच्छा काम कर रहे हैं।
कालसी: रोजगार से 550 महिलाओं को बनाया आत्मनिर्भर
देहरादून के कालसी ब्लॉक की पूर्व प्रधान रेखा देवी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए पिछले 20 वर्षों से काम कर रहीं है। उन्होंने संघर्ष स्वयं सहायता समूह के माध्यम से क्षेत्र की 550 महिलाओं को रोजगार जोड़ने की बड़ी पहल की। आज स्वयं सहायता समूह की धूपबत्ती, एलईडी बल्ब, अचार, स्क्वैश, मुरब्बा आदि की मांग प्रदेश में ही नहीं देश के अन्य राज्यों में भी जबरदस्त मांग है। वहीं समूह के माध्यम से प्रशिक्षण प्राप्त महिलाएं स्वरोजगार भी कर रही हैं। रेखा देवी पर्यावरण संरक्षण से रोजगार सृजन की दिशा में भी काम कर रही हैं। चकराता वन प्रभाग की मदद से उन्होंने बामनवाला में पहली महिला किसान पौधशाला का निर्माण किया है। यहां काम करने वाली सभी कर्मचारी महिलाएं हैं। पौधशाला में तैयार होने वाली फलदार वृक्षों और औषधीय पौध की आपूर्ति सरकारी कार्यालयों और निजी क्षेत्र में भी की जा रही है।
कोटद्वार: उर्मिला ने बेजुबानों के लिए घर में बनाया डॉग सेंटर
कोटद्वार के मालवीय उद्यान निवासी उर्मिला कंडवाल को बेजुबान प्राणियों की सेवा में बड़ा सुकून मिलता है। चोटिल कुत्तों के लिए तो वह देवदूत से कम नहीं हैं। उन्होंने अपने घर को डॉग सेंटर बनाकर 27 लावारिस कुत्तों को पनाह दी है। उर्मिला बताती हैं कि प्रारंभ में उन्होंने एक कुत्ता पाला था। जिससे उनका बेजुबान प्राणियों के साथ जुड़ाव हो गया। लगाव इस कदर बढ़ा कि 2016 में उन्होंने घर में ही डॉग सेंटर बना लिया। वह कहती हैं कि मनुष्य बोल सकता है और अपनी पीड़ा को जाहिर कर सकता है, लेकिन जानवर बेजुबान होते हैं और उन्हें भी समस्या होती है। मनुष्य यदि इन बेजुबानों की मदद के लिए आगे आएं तो उनकी समस्याओं का काफी हद तक निदान हो सकता है। बेजुबान प्राणियों के लिए लोगों को थोड़ा संवेदनशील होना होगा। उन्होंने डॉग सेंटर चलाने के लिए राधा-कृष्ण ट्रस्ट भी बनाया है।
कोटद्वार: मानसिक रूप से अस्वस्थ लोगों के लिए देवदूत हैं इंदू
मैले और गंदे कपड़े पहने सड़कों पर घूमते मानसिक रूप से अस्वस्थ लोगों को सभी ने कई बार देखा होगा, देखकर अनदेखा भी किया होगा। लेकिन भाबर क्षेत्र की हल्दूखाता निवासी इंदू नौटियाल इन्हें देखते ही परेशान हो उठती हैं। वह बिना समय गंवाए ऐसे लोगों को अपने घर ले जाती है और उन्हें नहला-धुलाकर अच्छे कपड़े पहनाती हैं। खाना खिलाकर उनके रहने के लिए आश्रम में व्यवस्था करवाती हैं। यही नहीं, आश्रम में जाकर उनकी निरंतर सुध भी लेती हैं। बीते दो साल से इंदु के लिए यह एक रूटीन का कार्य है। स्थानीय लोगों, पुलिस व प्रशासन के सहयोग से वह अब तक बेसहारा हाल में सड़कों पर घूम रहे आठ लोगों को यूपी के विभिन्न वृद्धाश्रमों में भेज चुकी हैं। वर्तमान में भाबर क्षेत्र में कोई भी पुरुष अथवा महिला इस हाल में नहीं घूम रहा है। शायद इसे ही नर सेवा नारायण सेवा कहा जाता है।
नौगांव (उत्तरकाशी): पारंपरिक व्यंजनों को रवांई रसोई से दी नई पहचान
रवांई घाटी के नौगांव निवासी जमुना रावत ने पारंपरिक व्यंजनों को रंवाई रसोई नाम से नई पहचान दी है। जिसके लिए जमुना को उत्तराखंड विकास प्रवर्तक सम्मान सहित कई पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है। नौगांव ब्लॉक की ठकराल पट्टी के मणपाकोटि गांव में जन्मीं जमुना रावत एक दशक से रवांई रसोई नाम से पारंपरिक व्यंजनों के स्टॉल लगा रही हैं। जिसके जरिये वह गांवों से शहरों की ओर पलायन कर चुके लोगों के बीच भी पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद व पहचान को कायम रखे हुए हैं। जमुना सरकारी व गैर सरकारी संस्थानों द्वारा आयोजित प्रदर्शनी व मेलों में भी स्टॉल लगाती हैं। जिसमें वह पारंपरिक व्यंजनों अस्के, सीड़े, डिन्डके, उड़द की दाल के पकोड़े, बड़ील, मंडुवे की रोटी, तिल कुचाई व झंगोरे की खीर आदि का प्रचार करती हैं। वर्ष 2021 में उन्हें उत्तराखंड विकास प्रवर्तक सम्मान से नवाजा गया था।
हरिद्वार: मां हूं, मां का दर्द जानती हूं कह तीन बच्चों को खोज लाईं भावना
इंस्पेक्टर भावना कैंथोला इन दिनों शहर कोतवाली प्रभारी की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। उनका कार्यकाल चुनौती भरा है। यात्री बहुल क्षेत्र में वीवीआईपी मूवमेंट के साथ ही बच्चों के अपहरण की कई घटनाएं होने से चुनौती और ज्यादा बढ़ जाती है। दिसंबर में कोतवाल का चार्ज संभालते ही एक बच्चे के अपहरण की घटना हुई। फिर लगातार अलग-अलग महीनों में दो और बच्चों का अपहरण हुआ। भावना ने रात दिन मेहनत कर अपनी टीम के साथ बच्चों को खोजा और अपहरण के आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचाया। बीते तीन माह पहले गाजियाबाद के परिवार के चोरी हुए बच्चे को खोजने से पहले कोतवाल भावना ने कहा था कि मां हूं बच्चे को खोज लाऊंगी। उन्होंने मां की भावना मन में लेकर वर्कआउट किया और बच्चों को ढूंढ लाई।