साईं बाबा की पूजा का विरोध करने वाले शारदा और ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा है कि साईं भक्त गंगा स्नान के बाद साईं मंदिर जाना छोड़ दें।
स्वरूपानंद सरस्वती ने यह बात साईं भक्तों के रविवार 29 जून को एकादशी पर गंगा स्नान के पर्व के संदर्भ में कही है। स्वरूपानंद का कहना है कि गंगा नहाकर शुद्घ होने के बाद साईं के मंदिर जाकर पाप नहीं करना चाहिए।
इससे पहले स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि वे साईं मंदिरों के खिलाफ अपनी बात पर कायम रहेंगे। इसके लिए वे फांसी तक चढ़ने को तैयार हैं और 24 अवतारों के अलावा अन्य किसी के मंदिर का समर्थन नहीं करेंगे।
जिन लोगों ने पाकिस्तान में जन्मे चांद मियां को साईं राम बना दिया, उनके साथ कोई समझौता संभव नहीं। वे किसी एफआईआर से भी डरने वाले नहीं है।
हिंदू शब्दों के दुरुपयोग पर जताया सख्त ऐतराज
जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि भारतीय धर्म ग्रंथों को साईं के नाम पर बदलना स्वीकार्य नहीं है। हिंदू शब्दों के दुरुपयोग को लेकर शंकराचार्य मठ कोर्ट जाएगा। साईं गीता और साईं गायत्री जैसे नकली ग्रंथों को हिंदू समाज बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेगा।
कनखल स्थित शंकराचार्य मठ में बुधवार को आयोजित वार्ता में जगद्गुरु शंकराचार्य ने कहा कि उनके उत्तराधिकारी अविमुक्तेश्वरानंद कुछ बिंदुओं को लेकर कोर्ट जाएंगे।
शंकराचार्य ने कहा कि साईं के साथ राम और शिव के नाम जोड़ना स्वीकार्य नहीं हैं। हिंदू शब्दों का उपयोग इस प्रकार नहीं किया जा सकता।
'साईं ट्रस्टों के नाम पर चल रहा नाटक'
उन्होंने कहा कि देश में साईं ट्रस्टों के नाम पर नाटक चल रहा है। बावजूद इसके उनके खिलाफ फौजदारी के मामले दायर किए जा रहे हैं। वे अपनी बात को लेकर न्यायालय में लंबी लड़ाई लड़ने को भी तैयार हैं।
जगद्गुरु शंकराचार्य ने कहा कि मलयेशिया की एक अदालत ने कुछ समय पहले फैसला दिया था कि अल्लाह शब्द का प्रयोग केवल मुसलमान कर सकते हैं। साईं के मंदिरों का संचालन मुस्लिम नहीं, अपितु हिंदू करते हैं।
उन्होंने मुसलमान संगठनों के उन बयानों का स्वागत किया, जिनमें साईं मंदिरों में अल्लाह के नाम के प्रयोग पर एतराज जताया है। शंकराचार्य ने कहा कि मुस्लिम समाज ने उनके बयान का समर्थन किया है।