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अब देश भर में होगा साईं पर 'संग्राम'

Tue, 26 Aug 2014 04:28 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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साईं पूजा के मुद्दे पर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती द्वारा बुलाई धर्म संसद में साईं मंदिरों का देशव्यापी विरोध का निर्णय लिया गया।
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एक पंथ के रूप में साईं को मानने पर संतों को आपत्ति नहीं थी। मंदिर बनाकर साईं की प्रतिमा भगवान की तर्ज पर स्थापित करने और साईं की पूजा-अर्चना मंदिरों में करने का धर्म संसद ने विरोध किया।

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती की अध्यक्षता में हुई धर्म संसद में संतों की एक संघर्ष समिति गठित की गई।

बागंभरी पीठ प्रयाग के अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरि इस समिति के अध्यक्ष बनाए गए हैं। अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री श्रीमहंत हरि गिरि, समिति के महामंत्री होंगे।
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धर्म संसद में पारित किए सात प्रस्ताव

धर्म संसद के आखिरी दिन श्रीमहंत हरि गिरि राजस्थान की शेखावाटी से सीधे रायपुर पहुंच गए। उनकी उपस्थित में ही धर्म संसद ने महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आयोजित दो दिवसीय धर्म संसद में सात प्रस्ताव पारित किए गए।

पहले प्रस्ताव में देशभर में जागरण अभियान चलाकर साईं मंदिरों के विरुद्ध आवाज उठाने का प्रस्ताव पारित हुआ। अयोध्या में राम मंदिर बनाने, गोहत्या रोकने, कन्या भ्रूण हत्या बंद करने, गंगा को अविरल बहने देने के प्रस्ताव पारित किए गए। जयराम पीठाधीश्वर ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी ने प्रस्ताव रखा की अगली धर्म संसद हरिद्वार में आयोजित की जाए।

सभी संतों ने इसे स्वीकार कर लिया। अखाड़ा परिषद के महामंत्री श्रीमहंत हरि गिरि ने बताया कि गठित की गई संघर्ष समिति में सभी अखाड़ों और संप्रदायों के संत शामिल होंगे। काशी विद्वत परिषद के सदस्यों को भी समिति में शामिल किया जाएगा।
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