पिछले करीब 13 सालों से दिल्ली स्थित मुख्य स्थानिक आयुक्त कार्यालय में जमे स्थानिक आयुक्त शंकर दत्त शर्मा के पुनर्नियुक्ति का आदेश शुक्रवार को निरस्त कर दिया गया। शासन ने उन्हें तत्काल प्रभाव से हटाने के आदेश जारी कर दिए हैं।
ऐच्छिक सेवानिवृत्ति के बावजूद शर्मा पहले अपर स्थानिक आयुक्त पद पर काबिज थे और उसके बाद उन्हें निसंवर्गीय पद पर स्थानिक आयुक्त बना दिया था।
गत 15 अप्रैल को इस प्रकरण को ‘अमर उजाला’ ने ‘सात सीएम बदले, स्थानिक आयुक्त की कुर्सी सलामत’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। शर्मा की नियुक्ति के संबंध में समाचार पत्र के दफ्तर को एक गुमनाम पत्र मिला था, जिसमें उनकी नियुक्ति को लेकर सवाल उठाए थे।
दरअसल, पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी के करीबी रहे शर्मा केंद्र सरकार के ईएसआई उपक्रम में नौकरी करते थे। एनडी की कृपा से वह प्रदेश सरकार के दिल्ली में निवेश-विनिवेश आयुक्त पद पर नियुक्त हो गए थे। वह लंबे समय तक अपर स्थानिक आयुक्त भी रहे। हालांकि शासन स्तर पर उन्हें बदलने की कोशिश भी हुई, लेकिन सियासत में उनका तगड़ा दखल होने से उनकी कुर्सी सलामत रही।
सियासी रसूख से ही वह स्थानिक आयुक्त भी बन गए, जबकि इस पद पर आईएएस अफसर की ही तैनाती हो सकती है। विवाद के तूल पकड़ लेने के बाद कार्मिक विभाग ने उनकी निसंवर्गीय पद पर पुनर्नियुक्ति के आदेश निरस्त कर दिए। प्रभारी सचिव कार्मिक अरविंद सिंह ह्यांकी ने इस आशय के आदेश जारी कर दिए हैं।