अगले साल हरिद्वार में होने वाले अर्द्धकुंभ से एक नई परंपरा प्रारंभ करने का रास्ता साफ हो गया है। मेला प्रशासन ने संतों की मांग पर अर्द्धकुंभ पर शाही स्नान की तैयारी शुरू कर दी है। मेला डीआईजी ने जूना अखाड़े जाकर सभी संतों से स्नान के बारे में पूरी जानकारी हासिल की।
गौरतलब है कि हरिद्वार अर्द्धकुंभ पर संतों की कोई भी गतिविधियां नहीं रहती हैं। इसके विपरीत प्रयाग में अर्द्धकुंभ पर सभी शाही स्नान होते हैं।
कुछ समय से संत यह सवाल उठाते आए हैं कि एक स्नान कर हरिद्वार अर्द्धकुंभ को भी संतों की विरासत से जोड़ दिया जाए। सात अखाड़ों की संन्यास परिषद इस पर पहले ही सहमत थी। लेकिन कुछ अखाड़ों से सहमति न मिल पाने के चलते । बाद में अन्य छह अखाड़ों ने भी सहमति प्रदान कर दी।