केंद्र में नशे के आदी लोगों को इलाजऔर काउंसिलिंग के नाम पर भर्ती किया जाता है, लेकिन यहां किस प्रकार के डॉक्टर मनोचिकित्सक होने चाहिए। इस प्रकार की कोई गाइडलाइन भी नहीं है। जबकि, इसी के नाम पर यहां हजारों युवाओं को भर्ती किया गया है।
‘कैसे हो कार्रवाई, जब गाइडलाइन ही नहीं’
नशा मुक्ति केंद्रों को चलाने के लिए किसी प्रकार की न गाइडलाइन है और न ही कोई एक्ट। ऐसे में वहां कुछ गड़बड़झाला भी हो पुलिस किन कानूनों में कार्रवाई करे। हालांकि, अब एसएसपी ने सभी केंद्रों की सूची तैयार कर इनका सत्यापन करने के निर्देश दिए हैं।
एसएसपी डॉ. योगेंद्र सिंह रावत ने बताया कि मामले सामने आने के बाद तमाम जानकारियां जुटाई गई हैं। सभी थाना पुलिस को निर्देशित किया गया है कि वह अपने-अपने क्षेत्र में ऐसे केंद्रों की सूची तैयार कर लें।
सभी केंद्रों का निरीक्षण किया जाएगा। अब केवल देखना यह है कि वहां पर कोई अपराध तो नहीं हो रहा है। ऐसे केंद्र सिर्फ सोसाइटी एक्ट के तहत पंजीकृत होते हैं। यदि कोई नियम कायदे इनके लिए होते तो इनके खिलाफ कार्रवाई में आसानी होती।