उत्तराखंड के अपर गृह सचिव पर यौन शोषण का आरोप लगाने वाली युवती को कड़कड़डूमा कोर्ट ने ट्रांजिट जमानत दे दी है। युवती ने उत्तराखंड में सक्षम अधिकारी के समक्ष पेश होने के लिए जमानत की मांग की थी।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश राजीव मेहरा ने आरोपी युवती को 25 हजार रुपए के निजी मुचलके और जांच अधिकारी की तसल्ली की शर्त पर दो सप्ताह की ट्रांजिट जमानत दी है।
दुष्कर्म की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज
जमानत पर बहस के दौरान युवती के अधिवक्ता अमित साहनी ने कहा कि उनकी मुवक्किल ने सचिवालय के वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ दुष्कर्म की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। इससे नाराज होकर संबंधित अधिकारी ने युवती के खिलाफ देहरादून में फर्जी मुकदमा दर्ज करवाया है।
उन्होंने कहा कि शोषण करने वाला अधिकारी अपर सचिव स्तर का है और उसके दवाब में उत्तराखंड पुलिस युवती को कभी भी गिरफ्तार कर सकती है। जबकि वह देहरादून में सक्षम अधिकारियों के समक्ष पेश होकर अपना पक्ष रखना चाहती है।
अभियोजन पक्ष ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी को जमानत मांगे बिना कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए देहरादून में सक्षम अधिकारी के समक्ष पेश होना चाहिए। आरोपी को जमानत देने पर वह उसका गलत फायदा उठा सकती है।
युवती को ट्रांजिट जमानत
अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद युवती को ट्रांजिट जमानत प्रदान कर दी।
शिमला की रहने वाली इस युवती ने नौकरी दिलाने के नाम पर उत्तराखंड शासन के गृह विभाग के अपर सचिव जेपी जोशी पर यौन शोषण का आरोप लगाते हुए पांडव नगर थाने में 22 नवंबर को रिपोर्ट दर्ज करवाई थी।
पीड़ित युवती ने उत्तराखंड के एक एसपी देहात के खिलाफ भी धमकाने का आरोप लगाया है।
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