डीएवी पीजी कॉलेज में सात शिक्षकों का आठ माह से वेतन अटका हुआ है। वह शासन और मंत्री के चक्कर काट रहे हैं। आरोप है कि नियमानुसार नियुक्ति होने के बाद भी सरकार ने उनका वेतन रोका हुआ है। इससे वह गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।
डीएवी पीजी कॉलेज में गत वर्ष विधि विभाग में छह और बीएड विभाग में एक असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति की गई थी। नियुक्ति के बाद गढ़वाल विवि ने इन पर मुहर भी लगा दी थी। कॉलेज में शिक्षकों ने सेवाएं देनी शुरू कर दी थी लेकिन आठ महीने से उन्हें वेतन नहीं मिला है। शिक्षकों का आरोप है कि सरकार ने जानबूझकर उनका वेतन रोक दिया है। उनका कहना है कि उनकी नियुक्ति के लिए बाकायदा विज्ञापन प्रकाशित होने के बाद इंटरव्यू हुए थे। इसके बाद की पूरी प्रक्रिया अमल में लाई गई थी। वेतन न मिलने की वजह से सभी असिस्टेंट प्रोफेसर परेशान हैं। उन पर गंभीर आर्थिक संकट आ खड़ा हुआ है। वह कई बार शासन और मंत्री से मुलाकात कर चुके हैं। बावजूद इसके कोई सुनने वाला नहीं है।
हमने जानबूझकर वेतन नहीं रोका है। कॉलेज प्रबंधन ने जो नियुक्तियां की थी, सरकार को उनकी जानकारी ही नहीं दी। शासन का कहना है कि नियुक्तियों पर रोक लगी हुई है तो नियुक्तियां कैसे की गई हैं? हम मामले को देख रहे हैं। शिक्षकों को परेशानी नहीं होने दी जाएगी।
- डॉ. धन सिंह रावत, उच्च शिक्षा राज्यमंत्री