II- सरकार की मांग पर प्रतिनियुक्ति से वापस बुलाए गए थे सेठ, आते ही मिली जिम्मेदारी
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I- पांच साल आईटीबीपी और एसएसबी में कई जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं दीपम सेठ
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Iमित्र पुलिस की कमान अब 1995 बैच के आईपीएस अधिकारी दीपम सेठ के हाथ में सौंप दी गई है। प्रतिनियुक्ति से आने के तुरंत बाद उन्हें प्रदेश का 13वां डीजीपी नियुक्त कर दिया गया है। सेठ ने सोमवार को पुलिस मुख्यालय में अधिकारिक रूप से चार्ज संभाला। इसके बाद उन्होंने मीडिया के सामने अपनी प्राथमिकताओं को बताया। उन्होंने कहा कि राज्य में कानून व्यवस्था कायम रखना, यातायात प्रबंधन और प्रदेश को ड्रग्स फ्री करना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा।
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Iबता दें कि पिछले साल आईपीएस अशोक कुमार के सेवानिवृत्त होने के बाद 1996 बैच के आईपीएस अधिकारी अभिनव कुमार को कार्यवाहक डीजीपी बनाया गया था। इसके बाद से स्थाई डीजीपी को लेकर उहापोह की स्थिति थी। प्रदेश कैडर के वरिष्ठतम आईपीएस अधिकारी दीपम सेठ प्रतिनियुक्ति पर थे। जबकि, अभिनव कुमार को स्थायी डीजीपी बनाए रखने में उनका मूल कैडर (उत्तर प्रदेश) पेच बना हुआ था। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई रिट (प्रकाश सिंह एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया) में वर्ष 2006 में पारित निर्णय के क्रम में उत्तराखंड में स्थाई डीजीपी के लिए गत सितंबर में एक पैनल भेजा गया था।
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Iइस पैनल में अभिनव कुमार का नाम नहीं था। इस पर संघ लोक सेवा आयोग की इंपैनलमेंट समिति की बैठक में पांच अधिकारियों के नामों का पैनल राज्य सरकार को भेजा गया। इसमें 1995 बैच के आईपीएस एडीजी दीपम सेठ का नाम सबसे ऊपर था। उन्हें जनवरी में डीजी रैंक पर भी पदोन्नत होना है। ऐसे में उन्हें गत 22 नवंबर को केंद्र सरकार को पत्र भेजकर प्रतिनियुक्ति से वापस बुलाया गया। उन्होंने सोमवार को कैडर ज्वाइन किया। इसके तत्काल बाद ही गृह सचिव शैलेश बगौली की ओर से उन्हें डीजीपी नियुक्त करने संबंधी आदेश जारी कर दिया गया। उन्होंने पुलिस मुख्यालय में कार्यवाहक डीजीपी अभिनव कुमार के अनुपस्थिति में प्रभारी एचओडी एडीजी एपी अंशुमान से विधिवत चार्ज ग्रहण किया।
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Iक्या है जनहित याचिका में सुप्रीम कोर्ट का निर्णय
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Iसेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी प्रकाश सिंह ने 1996 में एक रिट याचिका दायर की थी, जिसमें मांग की गई थी कि पुलिस संगठन को राजनीतिक नियंत्रण से मुक्त किया जाए, खासकर तबादलों और पोस्टिंग के मामलों में। यह अपील सुप्रीम कोर्ट में जनहित में की गई थी। यह अपील 2006 में फिर से सुर्खियों में आई जब सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस सुधार और पुलिस संगठनों को विनियमित करने और बदलने के लिए संशोधित पुलिस अधिनियम की घोषणा की, जिसमें मुख्य रूप से राज्यों के डीजीपी (पुलिस महानिदेशक) का कार्यकाल दो वर्ष का निश्चित किया गया।I