उत्तराखंड में अब ट्रैफिक पुलिस का अलग निदेशालय बनेगा। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में यह निर्णय लिया गया कि सीपीयू (सिटी पेट्रोल यूनिट) के साथ ट्रैफिक पुलिस भी मजबूत होगी।
मुख्य सचिव ने सीपीयू के लिए प्रस्तावित 286 पदों की संख्या को आधा करने के साथ ही पहले चरण में इस फोर्स को चार के बजाय दो शहरों में संचालित करने को कहा है। इस प्रस्ताव के बाद ही सीपीयू को स्थायी फोर्स गठित करने पर विचार होगा।
बैठक में मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह ने स्पष्ट कहा कि सीपीयू केवल एनफोर्समेंट का काम करती है, जबकि रेगूलेटिंग वर्क ट्रैफिक पुलिस को ही करना है। इसलिए ट्रैफिक पुलिस को मजबूत किया जाना जरूरी है। ट्रैफिक पुलिस के लिए अलग से एक निदेशालय स्थापित करने की कार्ययोजना तैयार करने के आदेश भी मुख्य सचिव ने दिए।
बैठक में पीएचक्यू ने सीपीयू को देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और नैनीताल में गठित करने का प्रस्ताव बैठक में रखा। इसके लिए चार निरीक्षक, 118 उप-निरीक्षक, 150 कांस्टेबल, 14 आरक्षी चालकों के पद सृजित करने का प्रस्ताव भी इसी में शामिल था। लेकिन मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि पहले चरण में चार नहीं दो शहरों में इस फोर्स को संचालित किया जाए, इसी के साथ जितने भी पदों का प्रस्ताव हैं, उनकी संख्या आधी की जाए।
पीएचक्यू ने सीपीयू के मानव संसाधन के लिए 12 करोड़ और अन्य संसाधनों के लिए 23 करोड़ मांगे थे, लेकिन मुख्य सचिव ने मानव संसाधन के लिए छह करोड़ और अन्य संसाधनों के लिए 10 करोड़ रुपये पर सहमति दी और प्रस्ताव नए सिरे से भेजने को कहा। नया प्रस्ताव आने के बाद ही सीपीयू को गठित करने की मंजूरी दी जाएगी।
नए पदों और धनराशि का प्रावधान वित्तीय वर्ष 2016-17 के बजट में किया जाएगा। अभी तक इस पुलिस बल की शासन से कोई अनुमति नहीं है। मुख्य सचिव ने कहा कि यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए पीडब्ल्यूडी, ऊर्जा, पेयजल, नगर निगम, विकास प्राधिकरण आदि के बीच समन्वय स्थापित कराया जाएगा। बैठक में प्रमुख सचिव गृह डा. उमाकांत पंवार, डीजीपी बीएस सिद्धू, एडीजी राम सिंह मीणा समेत तमाम अफसर मौजूद रहे।