देहरादून। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रायपुर के वरिष्ठ सहायक (पूर्व में नियुक्त अब निलंबित) पर 60 लाख रुपये से ज्यादा का गबन का आरोप है। विभागीय जांच के बाद आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। इसके बाद बुधवार को पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। आरोपी ने वर्ष 2012 से 2018 तक अस्पताल के यूजर चार्जेज को सरकारी खाते में जमा न कराकर अपने खर्च में ले लिया। जांच हुई तो उसने 22 लाख के गबन की बात स्वीकार भी कर ली थी।
एसओ रायपुर दिलबर सिंह नेगी ने बताया कि मंगलवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) रायपुर के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आनंद शुक्ला ने पूर्व में नियुक्त वरिष्ठ सहायक राकेश गुप्ता के खिलाफ तहरीर दी थी। उन्होंने बताया कि सीएचसी के पंजाब नेशनल बैंक खाते में वर्ष 2012 से 2018 के बीच 60.58 लाख रुपये के यूजर चार्जेज की धनराशि का गबन किया गया है।
जांच में आया कि राकेश गुप्ता वर्ष 2012 से 2018 तक वहां पर तैनात था। यहां उनके ऊपर आय व्यय का हिसाब रखने की जिम्मेदारी थी। यहां आने वाले कैश को उन्हें सीएचसी के खाते में जमा कराना होता था। इसे खाते में जमा न कराकर राकेश ने गबन कर लिया। इस बैंक खाते की गुप्ता ने एक फर्जी पासबुक भी बनाई, जिसमें उसने 22 लाख रुपये की फर्जी ट्रांजेक्शन भी दिखाई। साथ ही फर्जी ट्रेजरी बैंक चालान बनाकर विभाग के अधिकारियों को गुमराह किया। बुधवार को राकेश गुप्ता निवासी दुर्गाबाड़ी, थाना गोरखनाथ, गोरखपुर, उत्तर प्रदेश को गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ में उसने आरोप स्वीकार कर लिया। बृहस्पतिवार को उसे न्यायालय में पेश किया जाएगा। वर्तमान में वह टिहरी में तैनात था और उसे निलंबित कर दिया गया था।
जून 2018 में सामने आई थी गड़बड़ी
जून 2018 में सीएचसी रायपुर की चिकित्सा प्रबंधन समिति में वित्तीय गबन पकड़ा गया था। बैंक पास बुक, ट्रेजरी चालान, नकद भुगतान संबन्धी रजिस्टर की जांच करने पर खुलासा हुआ कि राकेश कुमार गुप्ता ने बैंक खाते में करीब 22 लाख की धनराशि दर्शायी थी। बैंक में पता करने पर पता चला कि जून 2018 में महज 1716.20 रुपये है। इसके लिए उसने माफीनामा भी विभाग को दिया था।