आपदा के मारों के जख्मों पर मरहम लगाने के बड़े-बड़े दावों की सच्चाई बहुत कड़वी है। ताजा उदाहरण है आपदा प्रभावित गांवों के किसानों को मुफ्त बीज वितरण का।
68345 किसानों को मुफ्त बीज दिया जाना था
सच्चाई यह है कि सबसे अधिक विनाश झेलने वाले रुद्रप्रयाग जिले के तमाम गांवों में तो बीज का एक दाना भी नहीं पहुंचा।
घोषणा के अनुसार सभी जनपदों के कुल 1832 गांवों में आपदा प्रभावित 68345 किसानों को मुफ्त बीज दिया जाना था।
कृषि विभाग के मुताबिक आपदा में 35 हजार 166 हेक्टेयर कृषि भूमि और फसलों को नुकसान हुआ था। किसानों को गेहूं, मसूर और सरसों के आठ हजार 887 क्विंटल मुफ्त बीज बांटने का प्रस्ताव तैयार किया गया था, लेकिन ऐन मौके पर सरकारी एजेंसियों ने हाथ खड़े कर दिए।
कृषि विभाग के अधिकारियों के मुताबिक सरकारी एजेंसियां नई प्रजाति के बीज उपलब्ध नहीं करा पाई। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत केवल उन्हीं प्रजाति के बीजों पर छूट दी जाती है, जो पांच साल से अधिक पुरानी न हो।
यह है स्थिति
प्रदेश में किसानों को केवल चार क्विंटल मसूर और तीन हजार कुंतल गेहूं का बीज मिला है, जबकि सरसों के बीज का एक दाना भी नहीं मिल पाया। 68 हजार किसानों में चार क्विंटल मसूर बीज किस तरह बंटा होगा इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
सरकार ने आपद प्रभावित क्षेत्रों में बिजली और पानी का बिल माफ करने का दावा किया था। लेकिन अब बीते महीनों का बिल एक साथ भेजा जा रहा है। बिल जमा न करने पर कनेक्शन काटने की चेतावनी भी दी गई है। मुफ्त बीज की घोषणा भी झूठी साबित हुई है।
- माधव कर्नाटकी, लमगोंडी गांव रुद्रप्रयाग
नई प्रजाति का बीज उपलब्ध न होने से समस्या बनी हुई है। विभाग को मात्र 34 सौ क्विंटल बीज मिला था, जो किसानों को बांट दिया गया।
- महिधर सिंह तोमर, उप निदेशक कृषि विभाग