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सत्र का दूसरा दिन: अंदर शांति, बाहर हंगामा

Tue, 25 Nov 2014 04:15 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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बसपा विधायक सरवत करीम अंसारी से जुड़े स्टिंग पर पहले दिन हुए हंगामे के बाद दूसरे दिन मंगलवार को भाजपा ने सदन को सुचारू रूप से चलाने में सहयोगा का वादा निभाया।
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सदन की कार्यवाही शांति से चली। मंगलवार को सत्र के दूसरे दिन संसदीय कार्यमंत्री इंदिरा हृदयेश सदन के पटल पर अनुपूरक बजट पेश करेंगी, जिसे बुधवार को पारित किया जाएगा।

इसके साथ ही सत्र में रज्जू मार्ग और हरित ऊर्जा उपकर विधेयक भी पेश किए जाएंगे। लेकिन विधानसभा परिसर के बाहर भाजपा नेताओं, कार्यकर्ताओं का विभिन्न मुद्दों पर जोरदार प्रदर्शन कर रहे हैं।
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प्रदर्शन में शामिल होने के लिए पूरे प्रदेश से भाजपा कार्यकर्ता आए हैं। इसका नेतृत्व भाजपा के उत्तराखंड प्रभारी श्याम जाजू कर रहे हैं। प्रदेश के कई बड़े नेता प्रदर्शन में शामिल हैं।

विधानसभा शीतकालीन सत्र के पहले दिन विपक्ष के हंगामे की भेंट चढ़े प्रश्न काल में कई महत्वपूर्ण सवालों पर चर्चा नहीं हो सकी।

हंगामे के बीच रह गए कई जरूरी सवाल
सोमवार को सीएम हरीश रावत और कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत के विभागों से संबंधित सवाल सदन में उठाए जाने थे। आपदा से प्रभावित गांवों के पुनर्वास, सरकारी स्कूलों में बिजली सप्लाई, आबकारी का एमफएल 2 स्टोर का मसला, चाय बगान मजदूरों की न्यूनतम दिहाड़ी, खनन, पहाड़ में सड़कों का निर्माण और पालीथिन पर रोक जैसे महत्वपूर्ण प्रश्न कार्यवाही में शामिल थे।

सदन में भाजपा विधायक मदन कौशिक के प्रदेश में आपदाग्रस्त गांवों के पुनर्वास पर पूछे प्रश्न पर सरकार ने लिखित जवाब में माना कि अभी 341 गांवों का पुनर्वास किया जाना है। जून 2013-14 की आपदा के बाद सरकार प्रभावित गांवों के पुनर्वास के लिए अभी तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं कर पाई है।

सरकार मान रही है की गांव संवेदनशील हैं, लेकिन अभी तक केवल दो सौ गांवों का तकनीकी भूगर्भीय सर्वेक्षण किया गया है। पुनर्वास के लिए सरकार अभी तक भूमि तलाश रही है।

आपदा प्रबंधन के लिए जिलों में सरकार की तैयारी को लेकर विधायक विजय बड़थ्वाल के प्रश्न में सरकार ने साफ किया कि 37.90 करोड़ 13 जनपदों को राज्य आपदा मोचन निधि से दिया गया है। हालांकि आपदा प्रबंधन पर जनपदों ने आवंटित राशि से क्या कार्य किए यह जबाव सरकार ने नहीं दिया है।

सदस्य नवप्रभात के प्रदेश में एफएल 2 (फारेन लिकर स्टोर) की नीति पर रखे सवाल रखा। लोकसभा चुनाव से पहले यह मामला बेहद विवादों में रहा है जब सरकार ने एफएल 2 के कई स्टोर बंद कर केवल दो स्टोर करने का फैसला लिया था। हालांकि मामला विवाद में आने के बाद सरकार बैकफुट पर आ गई।

बिना स्वीकृत अटैच हैं निदेशालय में कई कर्मी
महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री ने माना कि राज्य में आईसीडीएस निदेशालय में 6 कर्मचारी संबद्ध हैं जिनके पद स्वीकृत नहीं हैं। विधायक दिलीप सिंह रावत के सवाल पर सरकार के दिए जवाब में माना है कि निदेशक के तीन दिन में कार्यमुक्ति के आदेशों के बावजूद उनको रिलीव नहीं किया गया।

मुख्यमंत्री जिनके पास यह विभाग है उनकी ओर से दिए जवाब में बताया गया है कि निदेशालय में कार्मिकों की कमी एवं कार्य की अधिकता के दृष्टिगत किया गया है।

मुख्य सेविका बीना गिरी (वर्ष 2005 से), चालक महेश चंद्र (2007 से), प्रशासनिक अधिकारी उमा दत्त जोशी (2012 से) और बाल विकास परियोजना अधिकारी आशा ध्यानी (2013 से), विक्रम सिंह ( 2012 से) और अखिलेश मिश्रा (2012 से) अटैच हैं।

स्कूल में कंप्यूटर लगाने को बिजली नहीं
स्कूलों में कंप्यूटर शिक्षा या अन्य उपयोग के लिए विद्युत कनेक्शन का आवेदन के बावजूद ऊर्जा विभाग सुविधा नहीं दे पा रहा है। ऐसे में कंप्यूटर से स्कूलों को जोड़ने का दावा करने वाली सरकार की पोल खुलती है।

सदस्य सुरेंद्र सिंह जीना के सवाल पर मिले जवाब में सरकार ने माना है कि 1451 स्कूलों में कनेक्शन दिए जाने हैं। अल्मोड़ा में 188 स्कूल, चमोली में 370, पौड़ी में 279, रुद्रप्रयाग 116, पिथौरागढ़ में 76, नैनीताल में 4, टिहरी में 150, चंपावत में 172, हरिद्वार में एक , देहरादून में 18, उत्तरकाशी में 50 और बागेश्वर में 27 स्कूलों में बिजली नहीं लगने से कंप्यूटर नहीं लग पाए हैं।
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