सीएम हरीश रावत आपदाग्रस्त बस्तड़ी गांव का जायजा लेने पहुंचे।
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पिथौरागढ़ और चमोली के कई स्थानों पर बादल फटने से आई आपदा के बाद लापता 12 ग्रामीणों की खोजबीन मंगलवार को भी जारी रही। चमोली के घाट पुराने बाजार में एक जून को नंदाकिनी नदी के उफान में बहे रामचंद्र पुत्र बद्री प्रसाद ग्राम घूनी का शव मंगलवार देर शाम नंदाकिनी नदी किनारे मिल गया। शव मलबे में दबा हुआ था।
एक लापता को तलाशने के बाद एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, आईटीबीपी, एसएसबी और पुलिस समेत तमाम राहत एजेंसियों से जुड़े अधिकारी अब लापता लोगों के जिंदा बच निकलने की उम्मीद बेहद कम मान रहे हैं। उनका मानना है कि जिस तरीके से मलवा कई किमी के दायरे में फैला है उसमें लापता लोगों की खोजबीन करना आसान काम नहीं है।
सर्च अभियान रोकने पर विचार
ऐसे में अब सरकार सर्च अभियान रोकने पर विचार कर रही है। अपर सचिव आपदा सी. रविशंकर ने बताया कि फिलहाल सर्च अभियान जारी है और लापता लोगों की खोजबीन की जा रही है।
उल्लेखनीय है कि पिछले गुरुवार-शुक्रवार की रात में आई आपदा के बाद पिथौरागढ़ के बस्तड़ी और चमोली के घाट क्षेत्र में 15 ग्रामीणों की मौत हो गई थी, जबकि कई ग्रामीण लापता हो गए थे। सोमवार को बस्तड़ी गांव के मलबे से चार और मंगलवार को घाट गांव से एक शव मिलने के बाद मृतकों का आंकड़ा 20 पहुंच गया है। जबकि 11 ग्रामीण अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
ज्यादातर इलाकों में पानी, बिजली आपूर्ति बहाल
आपदा के बाद बदहाल हो चुकी बिजली आपूर्ति को काफी हद तक पटरी पर ला दिया गया है। अपर सचिव आपदा सी रविशंकर ने बताया कि आपदा के दौरान 1184 गांवों में बिजली व्यवस्था चरमरा गई थी। जिसमें से 1087 गांवों में आपूूर्ति बहाल कर दी गई है। पिथौरागढ़ के अलावा चमोली के घाट में भी एक मोबाइल चार्जिंग वैन भेजी गई है। आपदा के दौरान दोनों जिलों में 97 पेयजल योजनाएं क्षतिग्रस्त हो गई थी जिसमें से 50 योजनाओं को दुरुस्त कर दिया गया है।