सरकार की ओर से सेवानिवृत्त तहसीलदारों, नायब तहसीलदारों और कानूनगो की पुनर्नियुक्ति संबंधी आदेश जारी होने के बाद उत्तराखंड लेखपाल संघ विरोध में लामबंद हो गया है। संघ के प्रांतीय अध्यक्ष ताराचंद्र घिल्डियाल ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर पुनर्नियुक्ति पर रोक लगाए जाने की मांग की है।
संघ पदाधिकारियों का कहना है कि तहसीलदार, नायब तहसीलदार के पदों पर पदोन्नति के लिए डीपीसी की प्रक्रिया काफी समय से लंबित है। ऐसा होने से उक्त पदों पर पदोन्नति रुकी हुई है। इसी प्रकार राजस्व निरीक्षक के पदों पर पदोन्नति की प्रक्रिया मंडलायुक्तों एवं जिलाधिकारियों के कार्यालयों में लंबित है। जबकि वरिष्ठ पात्र कर्मचारी पदोन्नति की बाट जोह रहे हैं। ऐसे में यदि उक्त पदों से सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पुनर्नियुक्ति दी जाती है तो पात्र वरिष्ठ कर्मचारियों में निराशा व्याप्त हो सकती है।
कर्मचारियों में रोष
ज्ञात हो कि शासन द्वारा पूर्व में किए गए कतिपय सेवा विस्तार, पुनर्नियुक्ति संबंधी निर्णयों पर पर्वतीय पटवारी संघ, रजिस्ट्रार कानूनगो संघ एवं उत्तराखंड लेखपाल संघ द्वारा विरोध-पत्र प्रस्तुत किया गया था, परन्तु वर्तमान समय में शासन द्वारा पुन: पुनर्नियुक्ति संबंधी निर्णय लिये जाने से कर्मचारियों में रोष व्याप्त हो गया है।
वर्तमान में राजस्व विभाग में तहसीलदार, नायब तहसीलदार एवं राजस्व निरीक्षक के लगभग 200 पद रिक्त हैं जो कि डीपीसी नहीं होने की वजह से भरे नही जा रहे हैं। त्तराखंड लेखपाल संघ ने शासन से मांग की है कि यदि पुनर्नियुक्ति का निर्णय एक माह के भीतर निरस्त नहीं किया जाता है तथा पदोन्नति की प्रक्रिया संपन्न नही करायी जाती है तो प्रदेश भर के लेखपाल आंदोलन शुरू कर देंगे जिसकी जिम्मेदारी सरकार और शासन की होगी।