हरिद्वार स्थित मंसा देवी पर दान में आने वाली धनराशि व अन्य चढ़ावे के ब्यौरा जुटाने सहित अन्य व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासन ने ट्रस्ट के व्यवस्थापकों की बैठक ली।
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इस दौरान एसडीएम ने नारियल चढ़ावे का तीन साल का रिकॉर्ड मांगा। शनिवार को प्रशासनिक अधिकारियों ने मंसा देवी मंदिर पर दान की धनराशि व अन्य चढ़ावे में अनियमितताओं की शिकायत पर ट्रस्ट के पदाधिकारियों के साथ बैठक कर दस्तावेजों की जांच की।
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एसडीएम सोहन सिंह ने बताया कि ट्रस्ट के पदाधिकारियों से दान में मिलने वाली धनराशि का ब्यौरा लिया है। साथ ही दान में मिलने वाली हर धनराशि की रसीद काटने के आदेश दिए हैं।
रसीद बुकों का ब्यौरा रखने, इसमें कितनी रसीद बुक छपवाई और कहां छपवाई सभी का ब्यौरा देना होगा। नारियल के ठेके की जांच की गई। एसडीएम ने नारियल का तीन साल का ब्यौरा मांगा, लेकिन ट्रस्टी मौके पर रिकार्ड नहीं दिखा सके।
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जिस पर एसडीएम ने सात दिनों का समय दिया है। एसडीएम ने बताया कि अन्य शिकायतों पर मामलों की जांच की जा रही है। मंसा देवी की व्यवस्थाओं को सुदृढ़ किया जाएगा।
ताकि असल चढ़ावे की हो सके जांच
मंदिर पर सोने से बनी वस्तुओं को पीली धातु और चांदी की वस्तुओं को सफेद लिखकर दान में लिया जाता है। इससे कीमती धातु होने के चलते हुए इसमें बदलने व हेरफेर की आशंका होती है।
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लेकिन, अब दान में मिली इन धातुओं को उनकी वास्तविक धातु से बनी ही लिखा जाएगा, ताकि असल चढ़ावे की वस्तुओं की जांच हो सके।
पंडित सुदामा करेंगे पूजा-अर्चना
सिविल कोर्ट के आदेश पर पंडित सुदामा अब मंसा देवी मंदिर के पीछे बने मंदिर पर पूजा-अर्चना का कार्य कराएंगे, लेकिन दान की रसीद मंसा देवी ट्रस्ट के पदाधिकारी ही काटेंगे।
एसडीएम ने बताया कि कोर्ट के आदेश पर शनिवार से पंडित को पूजा का कार्य सौंप दिया है।