हरिद्वार में गुरुकुल कांगड़ी विवि के कुलपति और हरिद्वार के एसडीएम की गाड़ी पर लगी लाल-नीली बत्ती शुक्रवार को उतर गई।
अधिकारियों की पहल
अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद दोनों ने जिम्मेदारी का परिचय देते हुए अपने वाहनों से बत्ती उतरवा दी। दोनों अधिकारियों ने पहल की है। अनाधिकृत तौर पर लाल-नीली बत्ती लगाए अफसरों को इनसे सीख लेनी चाहिए।
गुरुकुल कांगड़ी विवि के कुलपति की गाड़ी पर दशकों से लालबत्ती लगी थी। मौजूदा सत्र से कार्यभार संभालने वाले कुलपति प्रो. सुरेंद्र कुमार के मुताबिक पहले उन्हें बताया गया था कि विश्वविद्यालय ने इसके लिए अनुमति ले रखी है।
कुलपति के मुताबिक लालबत्ती पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने के बाद उन्होंने बत्ती को ढकवा दिया था। शुक्रवार को उन्होंने अपनी गाड़ी से बत्ती उतरवा दी। शुक्रवार को कुलपति बिना बत्ती की गाड़ी से अपने ऑफिस पहुंचे।
वहीं दूसरी ओर हरिद्वार के एसडीएम सदर सोहन सिंह ने भी शुक्रवार को अपनी गाड़ी से नीली बत्ती उतार दी। एसडीएम नीली बत्ती लगाने के लिए अधिकृत ही नहीं है। उन्होंने बताया कि गाड़ी पर पहले से ही नीली बत्ती लगी थी। नियमों का पालन करते हुए उन्होंने बत्ती उतरवा दी है।
बत्ती उतारने के लिए सीडीओ को चाहिए आदेश
जिले की मुखिया जिलाधिकारी कह रही हैं कि अनधिकृत तौर पर लगी लाल-नीली बत्ती उतरवाने के लिए परिवहन विभाग की ओर से पत्र मिला है। वहीं दूसरी ओर मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) कह रहे हैं कि ऐसा कोई आदेश उन्हें नहीं मिला तो वह क्यों अपनी गाड़ी से नीली बत्ती उतारें।
परिवहन विभाग के पत्र और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद जिले में सीडीओ और एडीएम अपनी गाड़ियों पर नीली बत्ती लगाए दौड़ते रहे। एक तरफ जहां गुरुकुल कांगड़ी विवि के कुलपति और एसडीएम सदर ने अपने वाहनों से बत्ती उतार ली, वहीं इन अफसरों पर अभी कोई फर्क नहीं पड़ा है। सीडीओ तो नीली बत्ती उतारने जैसा कोई आदेश होने से ही इनकार कर रहे हैं।
मुझे गाड़ी से नीली बत्ती उतारनी चाहिए, ऐसा कोई आदेश नहीं मिला है। मैं गाड़ी पर नीली बत्ती नहीं लगा सकता, ऐसा आदेश कहां है।
- वीएस धनिक, मुख्य विकास अधिकारी, हरिद्वार