जून 2013 में केदारनाथ त्रासदी से सबक लेते हुए अब गंगा की धारा में हो रहे बदलाव का अध्ययन किया जा रहा है।
केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय की ओर से आईआईटी रुड़की के सिविल इंजीनियरिंग विभाग को इसकी जिम्मेदारी दी गई है। इसके तहत देवप्रयाग से फरक्खा बैराज तक गंगा की धारा का आकलन कर खतरनाक क्षेत्रों को चिह्नित किया जाएगा ताकि केदारनाथ आपदा जैसी तबाही कहीं और न हो।
अध्ययन के लिए 2.28 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं। उल्लेखनीय है कि 16 जून 2013 को केदारनाथ में आई आपदा की मुख्य वजह नदी में लैंड स्लाइड और अतिक्रमण को माना जाता है।