उत्तराखंड सरकार की नाक के नीचे बनकर तैयार हुए योजना भवन के निर्माण में 3.56 करोड़ का गबन का खुलासा हुआ है। यह खुलासा नियोजन विभाग द्वारा की जांच में हुआ। अब कार्रवाई के लिए फाइल पीडब्लूडी विभाग को भेजी गई है।
पीडब्लूडी ने मुख्य अभियंता की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन कर दिया है जो कि नियोजन की रिपोर्ट व अन्य बिन्दुओं का परीक्षण करेगी।
एनडी तिवारी सरकार में सचिवालय के पास योजना भवन बनाया जाना तय हुआ। इसके लिए केंद्र से आर्थिक मदद मिली और कार्यदायी संस्था केरूप में पीडब्लूडी को कार्यदायी संस्था बनाया गया। इस भवन की कुल लागत 14.85 करोड़ रुपए हुई।
चौबीस फीसदी रकम कर गए गोल
शिकायत मिली तो नियोजन विभाग विभाग ने एक्सपर्ट्स कमेटी से जांच कराई। आठ वर्षों में बनकर तैयार हुए योजना भवन की जांच जून के अंतिम सप्ताह में नियोजन विभाग के प्रमुख सचिव एस.रामास्वामी ने पीडब्लूडी के प्रमुख सचिव को भेजी।
जांच रिपोर्ट में कहा कि भवन की 24 फीसदी रकम को गोलमाल कर दिया गया। निर्माण तकनीकी का भी ध्यान नहीं रखा। कमरों के बीच में कॉलम खड़े करने से स्पेस का उचित इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। नियोजन विभाग ने पीडब्लूडी विभाग को संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय कर कार्रवाई करने की सिफारिश भी की है।
आरंभिक निर्माण के समय ही वाटरप्रूफिंग कोटा स्टोन का कार्य तकनीकी रूप से अनुपयोगिता के कारण बंद किया था, लेकिन इसके बावजूद 34.56 लाख रुपए का भुगतान कर दिया गया।
ये हैं गबन के मुख्य बिन्दु
(दशायी गई राशि लाख में)
: कंसलटेंसी चार्जेज - 53.25
: डिजाइन व ड्राइंग के निरीक्षण में फिजूलखर्ची - 5.00
: ड्रिलिंग ऑफ बोर ज्यादा खर्चा - 4.78
: नींव खुदाई की लागत - 25.91
: आरसीसी वर्क की लागत - 96.43
: वाटर प्रूफिंग वर्क का फर्जी भुगतान - 34.56
: स्टील की सामग्री में अधिक खर्चा - 77.39
: अन्य कार्य - 4.77
: डिजाइन में गड़बड़ी - 44.21
: कंटीनजेंसी - 10.38
: कुल खर्च - 3.56 करोड़
नियोजन विभाग के आधार पर पीडब्लूडी केमुख्य अभियंता की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया गया। यह कमेटी पूरे प्रकरण की जांच करेगी और इसके बाद अफसरों की जवाबदेही तय होगी।
-अमित नेगी, सचिव पीडब्लूडी