उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग तल्ला नागपुर पेयजल परियोजना में एक और घोटाला सामने आया है।
मामले की जांच, लेकिन कार्रवाई नहीं
परियोजना की कार्यदायी संस्था ने रास्ता बनाने के लिए एक करोड़ 82 लाख रुपए तो लिए लेकिन रास्ता नहीं बनाया। इसकी शिकायत की गई तो मामले की जांच पर जांच की जी रही है लेकिन कार्रवाई नहीं।
दरअसल, तल्ला नागपुर की पेयजल परियोजना में ट्रीटमेंट वर्क से डिस्ट्रीब्यूशन तक पाइप के साथ-साथ 70 किमी ब्रिडेल पाथ (कच्चा रास्ता, जिससे पहले परियोजना के लिए सामान आदि लाया-ले जाता और बाद में इसी रास्ते से परियोजना का निरीक्षण आदि किया जाता।) बनाया जाना था।
कार्यदायी संस्था ने रास्ते को बनाने के लिए एक करोड़ 82 लाख रुपया पेयजल निगम से पास तो करा लिया लेकिन रास्ता नहीं बनाया। कार्यदायी संस्था ने जोड़ तोड़ करके पाइप पर वेल्डिंग करके उसी को रास्ते का नाम दे दिया।
आरोप है कि जंगल के बीच बनाए जाने वाले 70 किलोमीटर के रास्ते के लिए कार्यदायी संस्था ने वन विभाग से अनुमति ही नहीं ली तो रास्ता कैसे बनाती?
इसकी शिकायत मिलने पर पेयजल निगम के तत्कालीन एमडी सीएम डिमरी ने मौके का निरीक्षण किया तो ब्रिडेल पाथ नहीं बनाने पर नाराजगी जताई और अधिकारियों को कार्रवाई के लिए आदेशित किया था लेकिन इस पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
पेयजल निगम का एमडी रहने के दौरान मामले की शिकायत मुझे मिली थी तो मौका मुआयना किया था। निरीक्षण में शिकायत सही पाई थी। मौके पर ब्रिडेल पाथ नहीं बनाया गया था। मैंने संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई के लिए आदेशित किया था। अब क्या स्थिति है, मुझे नहीं मालूम।
- सीएम डिमरी, पूर्व एमडी, पेयजल निगम
यदि ब्रिडेल पाथ नहीं बनाया गया होता तो पाइपों के वेल्डिंग के लिए जनरेटर आदि सामान कैसे जाता? और यदि नहीं गया होता तो पाइपों की वेल्डिंग कैसे होती? यह सभी टेक्निकल बातें हैं, जिन्हें बारीकी से समझना होता है।
- भजन सिंह, एमडी पेयजल निगम
ब्रिडेल पाथ नहीं बनाने की शिकायत पेयजल मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी से लेकर पेयजल निगम के सभी अधिकारियों से कर चुका हूं। लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। 70 किमी ब्रिडेल पाथ जंगल के बीच बनाया जाना था लेकिन कंपनी ने इसके लिए वन विभाग से अनुमति तक नहीं ली। जाहिर है कि ब्रिडेल पाथ के नाम पर मिलने वाले पैसे को पहले ही हजम करने की योजना बना ली गई थी।
- संजीव गुप्ता, आरटीआई, एक्टिविस्ट
पिछले साल शिकायत, इस साल जांच
वर्ष 2011 में यह परियोजना शुरू हुई थी। वर्ष 2012 तक ब्रिडेल पाथ बन जाना चाहिए था। नवंबर 2013 में सीएम डिमरी के पास ब्रिडेल पाथ नहीं बनने की शिकायत आई।
डिमरी ने मौका मुआयना किया तो शिकायत को सही पाया। इसके बाद इसी साल अप्रैल माह में डीएम रुद्रप्रयाग ने मामले की जांच के लिए समिति गठित की। समिति ने दो जून को पेयजल परियोजना की स्थलीय जांच की।
जांच समिति के अध्यक्ष मुख्य विकास अधिकारी एमएस राणा का कहना है कि समिति में अन्य विभागों के भी सदस्य थे। सभी ने मिलकर जांच की। जांच रिपोर्ट डीएम को सौंप दी गई है।
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