उत्तराखंड के चंपावत जिले में आरटीआई से मनेरगा में हो रहे बड़े घपले का खुलासा हुआ है।
भले ही मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार) में श्रम कानूनों के पालन की बात हो रही हो लेकिन हाल यह है कि नियोक्ता श्रमिकों से छल करने में बाज नहीं आ रहे हैं। मामला मनरेगा से जुड़ा है।
एक नियोक्ता एजेंसी ने स्टांप पेपर पर ही श्रमिकों से लिखवा लिया कि भविष्य निधि की जरूरत नहीं है। आरटीआई में मामले का खुलासा हुआ। इस संबंध में राज्य सूचना आयोग ने मुख्य सचिव को भी पत्रावली भेजी है। आयोग ने कहा है कि जिलाधिकारियों से इस तरह के प्रकरणों की जांच सभी जिलों में कराई जा सकती है।
मामला चंपावत जिले से संबंधित है। चंपावत निवासी राजेंद्र खर्कवाल ने जिला विकास अधिकारी से मनरेगा के तहत श्रमिकों के भविष्य निधि के भुगतान की जानकारी मांगी थी। जानकारी नहीं मिली तो मामला राज्य सूचना आयोग तक पहुंचा।