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मां-बाप के लिए करियर को कहा अलविदा

Tue, 21 Jan 2014 11:45 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
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लोग बेटों की कामना इसलिए करते हैं, क्योंकि उन्हें बुढ़ापे में उनसे सहारे की उम्मीद होती है। लेकिन ऐसी धारणा रखने वालों के लिए यह एक उदाहरण हैं।
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मेडिकल ग्राउंड पर फौज को कहा अलविदा
फौज में अच्छे पदों पर कार्यरत दो भाइयों के बावजूद कैप्टन रजनी मैठाणी ने फौज को मेडिकल ग्राउंड पर इसलिए अलविदा कह दिया ताकि वह अपने बूढ़े, बीमार मां-बाप की देख-रेख के लिए उनके साथ रह सकें।

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हॉस्पिटल मैनेजमेंट में एमबीए कर चुकीं रजनी के पास अभी भी नौकरी के ढेरों ऑफर हैं, लेकिन रजनी के लिए सबसे अहम कार्य अपने माता-पिता की सेवा करना है।

मोथरोवाला निवासी 40 वर्षीय रजनी मैठाणी ने स्कूली एजुकेशन के बाद इलेक्ट्रॉनिक एंड टेलीकम्युनिकेशन में डिप्लोमा लिया। इसके बाद सेना में उनकी नौकरी लग गयी। 11 साल में कैप्टन रैंक तक पहुंचने के बाद एक दिन रजनी ने सेना से इस्तीफा दे दिया।
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वजह थी पिता की बीमारी। इंडियन एग्रीकल्चर रिसर्च इंस्टीट्यूट (आईएआरआई) नई दिल्ली में प्रशासनिक अधिकारी के पद पर तैनात रजनी के पिता का एक्सीडेंट हुआ तो एक हिस्सा पैरालाइज्ड हो गया। अब वह व्हील चेयर पर जिंदगी बिता रहे हैं।

कुछ समय पहले स्लिप होने की वजह से उन्हें हिप बोन फ्रैक्चर भी हो गया है। उधर, मां सरोज का भी घुटना बदला जाना है। दरअसल हाल ही में बाथरूम में गिरने की वजह से वह चलने-फिरने से महरूम हो गई हैं।

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रजनी के बड़े भाई एयरफोर्स में स्क्वाड्रन लीडर के पद पर अहमदाबाद में तैनात हैं और दूसरे भाई मेजर के रूप में हिसार में, लेकिन रजनी को किसी से कोई शिकायत नहीं। वह कहती हैं, किसी-न-किसी को तो मां-बाप के साथ रहना ही था, बेटी हूँ तो क्या हुआ। मैंने ही मां-पिताजी के साथ रहने का फ़ैसला किया। 

बच्चों का संस्कारी होना जरूरी
रजनी बेटी सिद्धि के लिए सुपर मां हैं। सिद्धि इस वक्त कक्षा सात में पढ़ रही है। पति से अलग रह रहीं रजनी के मुताबिक सिंगल पेरेंट्स होने के नाते कहीं भी नौकरी करने या बसने में कोई दिक्कत नहीं थी और न ही है।

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लेकिन तब मां-बाप अनदेखे रह जाते। रजनी के मुताबिक बच्चे वही सीखते हैं, जो देखते हैं। मां-बाप का सम्मान करने का संस्कार उन्हें बचपन से ही मिलना चाहिए। बेटी को भी यही सिखाया है।
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तीनों भाई-बहन ने चुनी सेना
रजनी के घर में कोई फौज में नहीं था। इसके बावजूद तीनों भाई-बहनों ने सेना को तरजीह दी। तीनों अंगों थल सेना, जल सेना और वायु सेना में काम किया।

फौज से अलग होने के बावजूद फौज की नौकरी के प्रति रजनी का लगाव कम नहीं हुआ है। रजनी कहती हैं मेरी बेटी सिद्धी अपना करिअर चुनने के लिए स्वतंत्र है लेकिन मुझे ख़ुशी होगी अगर वह सेना ज्वाइन करती है।
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