हौसला जब मंजिल छूने का हो तो हर दुश्वारी दूर हो जाती है। संगीत में देहरादून की बेटी मनदीप कौर ने खूब नाम कमाया है।
पढ़ें, मैरिज रजिस्ट्रेशन फॉर्म लेने पहुंचे कई बुजुर्ग
शुक्रवार को इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ के आयोजित दीक्षांत समारोह में मनदीप कौर को छत्तीसगढ़ के राज्यपाल ने एमए सितार में गोल्ड मेडल से सम्मानित किया। एमडीडीए कॉलोनी निवासी मनदीप कौर के पिता बलबीर सिंह डालनवाला में स्टेशनरी की दुकान चलाते हैं।
मनदीप ने बताया कि एमकेपी इंटर कॉलेज से 12वीं करने के बाद उन्होंने एमकेपी पीजी कॉलेज से ग्रेजुएशन और डीएवी पीजी कॉलेज से अंग्रेजी में एमए किया। इसके बाद उन्होंने दून में ही भातखंडे से विशारद की डिग्री ली।
पढ़ें, नरेंद्र मोदी के लिए अब ये भी करेंगे बाबा रामदेव
मनदीप के मुताबिक उन्हें बचपन से संगीत का शौक रहा है। वह संगीत में आगे बढ़ने के साथ ही सितार के गौरवशाली इतिहास को बचाने के लिए काम करना चाहती हैं।
पढ़ें, निहारिका के टैंलेट को निहारेगा पूरा देश
युवाओं के बीच सितार के प्रति जागरुकता बढ़ाना चाहती हैं। मनदीप की मां बलविंदर कौर सरकारी नौकरी में हैं। भाई गगनदीप सिंह पढ़ाई कर रहा है।
नहीं मानी हार
मनदीप ने बताया कि उनकी साथी छात्राएं हमेशा उनके संगीत के शौक पर अजीब सा रिस्पांस देती थीं लेकिन वह निरुत्साहित नहीं हुई। शौक को पूरा करने के लिए जी तोड़ मेहनत की, जिसका नतीजा सामने है।
बेटी बेमिसाल
मनदीप कौर के पिता बलबीर सिंह ने बताया कि उनके एक बेटा और एक बेटी है। बेटी को लोग हमेशा पढ़ाई लिखाई में दूसरे दर्जे पर लेकर चलते हैं लेकिन मैंने अपनी बेटी के साथ भेदभाव नहीं किया।
पढ़ें, स्पीक एशिया के बाद अब लूटने आई यह कंपनी
इसी का नतीजा है कि आज मनदीप ने सितार में गोल्ड मेडल हासिल करके परिवार का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया। बलबीर सिंह कहते हैं कि माता पिता को बेटे और बेटी फर्क नहीं करना चाहिए। दोनों को बराबरी की तालीम दिलाएं।
बैंकिंग परीक्षा में राज्य में बनाया पहला स्थान
देहरादून की भानियावाला की रविता नेगी ने इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनल सलेक्शन की परीक्षा (आईबीपीएस) में 150 अंकों के साथ राज्य में पहला स्थान बनाया है। 21 बैंकों की परीक्षा में रविता ने सफलता के लिए लगन के साथ अध्ययन को मूलमंत्र बताया है।
मेधावी छात्रा का कहना है कि व्यवस्थित तरीके से किया अध्ययन सफलता को नजदीक लाता है। द्वाराहाट से एमसीए करने वाली रविता के पिता केंद्रीय रिजर्व पुलिस फोर्स से सेवानिवृत्त अधिकारी हैं। तीन भाई बहनों में सबसे छोटी रविता बचपन से ही मेधावी रही हैं।
एसजीआरआर भानियावाला से उसने हाईस्कूल और इंटर की परीक्षाएं अच्छे अंकों में उत्तीर्ण कर जीवन में कुछ नया करने का संकल्प लिया।
अभिभावकों की प्रेरणा पाकर रविता ने बैंकिंग में कॅरियर बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया। बकौल रविता लक्ष्य पर फोकस कर सुव्यवस्थित तैयारी से ही सफलता को पाया जा सकता है।