फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

छोटी उम्र में इस बेटी ने किए बड़े काम

Sat, 18 Jan 2014 12:29 PM IST
संदीप थपलियाल/ अमर उजाला, रुद्रप्रयाग
विज्ञापन
विज्ञापन
छोटी उम्र में माता-पिता का साया सिर से उठने के बाद भी रुद्रप्रयाग की सोनम ने हार नहीं मानी। उसने खुद भी पढ़ाई की और अपने छोटे भाई-बहन को भी पढ़ाया।
विज्ञापन


छत से गिरने के कारण हुई पिता की मौत
अगस्त्यमुनि के निकट हाट गांव की रहने वाली सोनम के पिता खुशाल सिंह नेगी गुजरात में फैक्टरी में काम करते थे। फैक्टरी बंद होने पर वह घर लौट आए। करीब साढ़े आठ वर्ष पूर्व वह कंपनी में अपना बकाया लेने गुजरात गए।

पढ़ें, मैरिज रजिस्ट्रेशन फॉर्म लेने पहुंचे कई बुजुर्ग

जहां छत से गिरने के कारण उनकी मौत हो गई। इस घटना के तीन साल बाद मां बीमारी के कारण दुनिया छोड़कर चली गई। अब घर में बच गए थे सोनम, उसकी दादी इंद्रदेई, बहन मोनिका और भाई आशीष।
विज्ञापन


तब सोनम की उम्र करीब दस साल थी। अंदर से बुरी तरह टूट गई सोनम ने हिम्मत नहीं हारी। उसने अपने भाई-बहनों के साथ पढ़ना जारी रखा। साथ ही आजीविका चलाने के लिए खेतीबाड़ी और भैंस पालने का काम किया।

पढ़ें, नरेंद्र मोदी के लिए अब ये भी करेंगे बाबा रामदेव

इस काम में सहायता और गाइडेंस दी, शिक्षक नरेंद्र गोस्वामी ने। वर्तमान में 18 वर्षीय सोनम अगस्त्यमुनि महाविद्यालय से पीसीएम ग्रुप में बीएससी द्वितीय वर्ष में अध्ययनरत हैं। सोनम की दिनचर्या बहुत व्यस्त है।

सुबह के समय घर के जरूरी काम निपटाने के बाद वह अगस्त्यमुनि में कंप्यूटर सेंटर में दो घंटे पढ़ाती है। इसके बाद कालेज और फिर शाम को ट्यूशन।

पढ़ें, स्पीक एशिया के बाद अब लूटने आई यह कंपनी

उसको इस मेहनत का लाभ मिला भी है। छोटी बहन मोनिका आयुर्वेद फार्मेसी का कोर्स कर रही है। जबकि छोटा भाई आशीष बारहवीं का छात्र है।

आर्थिक मदद को नैथानी आए आगे
आर्थिक तंगी को देखते हुए सोनम की छोटी बहन मोनिका की मदद के लिए आगे आए शिक्षक चंद्रमोहन नैथानी। श्री नैथानी ने मोनिका के विद्यापीठ आयुर्वेंद कॉलेज में एडमिशन के लिए 50 हजार रुपए की सहायता दी। नैथानी बताते हैं कि मेधावी बालिकाओं के आगे बढ़ने में कोई रुकावट नहीं आनी चाहिए। इसलिए उन्होंने मदद की।
विज्ञापन


पढ़ें, निहारिका के टैंलेट को निहारेगा पूरा देश

सोनम बहुत होनहार बालिका है। उसने विपरीत परिस्थितियों में हिम्मत नहीं हारी। ऐसी ही बालिकाएं समाज को प्रेरणा देती हैं।
- ओम प्रकाश सेमवाल, साहित्यकर्मी

शिक्षा के क्षेत्र में जाने का लक्ष्य है। माता-पिता का सिर से साया उठने के बाद अंदर से आवाज आई कि कुछ करना है। जिससे अपने साथ ही पूरे परिवार को भी देखना था। यदि मैं कुछ नहीं कर पाती, तो अपने से छोटों का भविष्य कैसे बन पाता।
- सोनम नेगी
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें