साथी के मजाक की वजह से कुर्सी से गिरे सौरभ की कमर भले ही टूट गई लेकिन उसका हौसला नहीं टूटा।
आठ महीने बिस्तर पर उल्टा लेटकर परीक्षा की तैयारी करने वाले सौरभ ने आईआईटी की प्रवेश परीक्षा जेईई एडवांस में ऑल इंडिया 320वीं रैंक हासिल कर मिसाल कायम की है। उनकी कमर में तीन स्लिप डिस्क हैं, जिस वजह से वह बैठ नहीं पाते हैं। सौरभ सेंट जोजेफ्स एकेडमी के पूर्व छात्र हैं।
मूल रूप से यूपी के बागपत जिले के गांव पलडी निवासी सौरभ का परिवार हाथी बड़कला स्थित सर्वे ऑफ इंडिया कालोनी में रहता था। वर्ष 2013 में उनके पिता एसवी सिंह का तबादला त्रिवेंद्रम हो गया।
जेईई एडवांस परीक्षा में ऑल इंडिया 320वीं रैंक
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उनकी आठवीं तक की शिक्षा सेंट जोजेफ्स एकेडमी से हुई। वर्ष 2015 में 11वीं कक्षा में उनके एक साथी छात्र ने मजाक में पीछे से कुर्सी हटा दी। सौरभ जोर से फर्श पर गिरा और फिर खड़ा न हो सका।
एमआरआई कराया तो पता चला कि निचली कमर टूट गई है और इसमें तीन डिस्क प्रोलेप्स हो गया है। डॉक्टरों ने पूरी तरह से बेड रेस्ट की सलाह दी लेकिन सौरभ को आईआईटी में जाने का जुनून सवार था।
कमर टूटने की वजह से जब बैठकर पढ़ाई नहीं कर पाया तो बिस्तर पर उल्टा लेटकर पढ़ाई की। जेईई मेंस परीक्षा क्वालिफाई किया। इसके बाद इंजीनियरिंग की सबसे मुश्किल जेईई एडवांस परीक्षा में ऑल इंडिया 320वीं रैंक हासिल की। सौरभ ने बताया कि उनका सपना कंप्यूटर इंजीनियरिंग की दुनिया में नाम कमाना है।
स्कूल ने लगा दिया था बिस्तर
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सौरभ की खड़े न हो पाने और बैठ न पाने की समस्या को देखते हुए स्कूल ने भी बहुत साथ दिया। सौरभ के पिता एसवी सिंह ने बताया कि स्कूल प्रशासन ने सौरभ के लिए एक अलग कक्ष में बिस्तर लगा दिया था।
शिक्षक वहीं पढ़ाते। 12वीं के आने तक सौरभ की हालत बिगड़ गई और उसका हिलना डुलना भी बंद हो गया। इस बीच पिता एसवी सिंह का तबादला हैदराबाद से त्रिवेंद्रम हो गया। मां चित्रा सिंह ने बिस्तर पर उल्टे लेटकर तैयारी करने में पूरा साथ दिया।
प्रतिभा के धनी हैं सौरभ
बिना कोई कोचिंग और क्लास किए, बिस्तर पर उलटा लेटकर सौरभ ने जेईई एडवांस परीक्षा में 320वीं रैंक के साथ ही गणित में 122 में से 120 अंक हासिल किए। गणित व भौतिकी में विशेष प्रतिभा के धनी सौरभ ने 2014 में 10वीं कक्षा में केंद्रीय विद्यालय संगठन के गणित ओलंपियाड में अखिल भारतीय स्तर पर तीसरा स्थान प्राप्त किया।
2016 में भारतीय भौतिक ओलंपियाड में सफ लता हासिल करते हुए इसी साल सौरभ विज्ञान एवं तकनीकी मंत्रालय, भारत सरकार की किशोर वैज्ञानिक प्रोत्साहन योजना के तहत चुने गए।