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उत्तराखंड में मानसून सिर पर और तैयारियां सिफर

Tue, 20 Jun 2017 08:32 AM IST
प्रमोद सेमवाल/ अमर उजाला, गोपेश्वर
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मानसून आने वाला है और इसकी तैयारियां अभी सिफर हैं। स्थिति यह है कि चमोली जिला प्रशासन की ओर से टेंट और तिरपाल की खरीद के लिए अब तक टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं की गई है।
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चालू वित्तीय वर्ष में शासन से जिले को टेंट, तिरपाल, राहत और अन्य आपदा प्रबंधन की सामग्री के लिए मात्र 30 लाख का बजट मिला है। इतनी कम राशि के इस्तेमाल पर ही अभी प्रशासनिक अधिकारी मंथन कर रहे हैं। 22 जून को आपदा राहत-बचाव सामग्री की खरीद के लिए जिलास्तर पर टेंडर प्रक्रिया शुरू होगी।

चमोली जिले के 78 गांवों में 2653 आपदा प्रभावित परिवार हैं। इनमें 17 संवेदनशील और 20 अति संवेदनशील गांव हैं। वर्ष 2013 की आपदा के बाद से गणांई, मोल्टा, चमेली, त्यूला और छपाली ऐसे गांव हैं, जहां मकान बाहर से दिखने में तो सुरक्षित लगते हैं लेकिन अंदर जगह-जगह दीवारों में पड़ी दरारें मकानों की दयनीय स्थिति को बयां करते हैं। गणांई गांव के ठीक पीछे गदेरे से हो रहा भूस्खलन थोड़ी सी बारिश में भी खतरा बन जाता है।
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अपने घर छोड़कर दूसरों के घरों में शरण लेनी पड़ रही है

RAIN - फोटो : Amar Ujala
आपदा प्रभावित पारेश्वरी देवी, छुम्मा देवी, महिपाल सिंह, देवेंद्र सिंह और कमल सिंह का कहना है कि भारी बारिश होने पर उन लोगों को अपने घर छोड़कर दूसरों के घरों में शरण लेनी पड़ रही है। वर्ष 2013 में जिलाधिकारी से टेंट और तिरपाल की मांग की गई, लेकिन तिरपाल आज तक उन्हें नहीं मिला। नारायणबगड़ क्षेत्र के आपदा प्रभावित दरवान सिंह, चेता देवी और कमला देवी का भी यही कहना है।

आपदा प्रभावित 78 गांवों के पुनर्वास के लिए भूमि चयन प्रक्रिया जारी है। बरसात से पहले ही प्रभावित परिवारों को टेंट, तिरपाल मुहैया करा दिए जाएंगे। जिले से लेकर शासन स्तर पर प्रभावित गांवों के विस्थापन की कार्रवाई चल रही है।
- नंद किशोर जोशी, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी, चमोली

चमोली जिला आपदा प्रबंधन विभाग संविदा कर्मचारियों के भरोसे चल रहा है। आपदा प्रबंधन विभाग में आपदा आने पर एक रस्सी तक उपलब्ध नहीं होती है। शासन स्तर पर कई बार आपदा प्रभावित गांवों के विस्थापन और पुनर्वास के लिए दबाव बनाया गया, लेकिन अब तक स्थिति जस की तस है।
- राकेश खनेड़ा, अध्यक्ष, चमोली आपदा प्रभावित संघर्ष समिति
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