भाजपा नेता एवं धर्मगुरु सतपाल महाराज ने खुलासा किया कि उन्हें कांग्रेस में रोकने के लिए केंद्र में मंत्री बनाने का ऑफर दिया गया था, लेकिन उन्होंने इसे ठुकरा दिया।
महाराज ने आरोप लगाया कि हिंदूवादी चेहरा होने के चलते कांग्रेस उन्हें आगे बढ़ाने में डर रही थी।
सोमवार की दोपहर प्रेमनगर आश्रम में पत्रकारों से बात करते हुए सतपाल महाराज ने कहा कि उन्होंने कांग्रेस की 25 साल सेवा की। लेकिन उनके हिंदूवादी चेहरे को कांग्रेस बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी। जबकि वह मानवता और उदारवादी दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।
हरीश रावत पर जताया भरोसा
महाराज ने कहा कि 2009 के लोकसभा चुनाव के बाद उत्तराखंड से मंत्री बनाने की बात आई तो कांग्रेस ने हरीश रावत को तरजीह दी।
इसके बाद मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा को बदलने की बात आई तो फिर से हरीश रावत पर हाथ रख दिया गया। हमने इसकी शिकायत आलाकमान से की तो कहा गया कि हरीश रावत के साथ पहले अन्याय हुआ था।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि पहले केंद्र में मंत्री और फिर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनाने जैसा ‘अन्याय’ तो सभी के साथ होना चाहिए।
जब पार्टी छोड़ने की बात आई तब मिला ऑफर
सतपाल महाराज ने कहा जब उन्होंने कांग्रेस छोड़ने की बात की तो हरीश रावत की जगह केंद्र में मंत्री बनाने का ऑफर दिया गया लेकिन उन्होंने साफ मना कर दिया।
भला एक महीने का मंत्री कौन बनना चाहेगा। भाजपा पर धर्म के नाम पर वोट मांगने के आरोपों पर महाराज ने कहा कि राजनीति में धर्म का उपयोग तो कांग्रेस कर रही है।
कांग्रेस ने राजनीति में इमाम का सहारा लिया। पत्नी अमृता रावत के कांग्रेस में बने रहने के सवाल पर सतपाल महाराज ने कहा कि उन्होंने अपनी विधानसभा के लिए कुछ संकल्प लिया है। वह अपनी राजनीतिक राय के लिए स्वतंत्र हैं। इस दौरान दक्षिणी काली मंदिर पीठाधीश्वर स्वामी कैलाशानंद ब्रह्मचारी भी मौजूद थे।
विकास के लिए मोदी को दिया प्लान
नरेंद्र मोदी को पहाड़ी राज्यों के लिए विकास के लिए प्लान बनाकर दिया है, जिसे नरेंद्र मोदी ने 10 अप्रैल को सिलीगुड़ी की रैली में स्वीकार कर लिया।
हिमालयी क्षेत्र में सैन्य आवागमन, जल संसाधन प्रबंध, दैवीय आपदा, आर्थिक विकास, स्वास्थ्य, रेल मार्ग, सड़कों का विस्तार आदि को लेकर विस्तृत प्लान बनाया गया है। केंद्र में भाजपा की सरकार बनते ही इस प्लान पर काम शुरू किया जाएगा।