उत्तराखंड के तराई पश्चिमी वन प्रभाग की सीमा में एक और बाघ का बेरहमी से कत्ल किया गया है। बाघ के कई अंग धारदार हथियार से काटे गए हैं।
सोमवार को शव मिलने से वन विभाग के अधिकारियों में खलबली मच गई। अफसरों ने भी हत्या की बात से इंकार नहीं किया है।
घटनास्थल का निरीक्षण
बैलपड़ाव रेंज के पश्चिमी चांदनी बीट गैबुआ में शव पड़ा होने की सूचना के बाद सोमवार को डीएफओ राहुल ने घटनास्थल का निरीक्षण किया।
शव का रामनगर में डा. भरत और डा. राजीव सिंह के नेतृत्व में पोस्टमार्टम में बाघ की हत्या का खुलासा हुआ। डा. राजीव सिंह ने मौत का कारण धारधार हथियार से सांस और आहार नली काटा जाना बताया।
बाघ के शरीर में कई घाव
हड्डियां टूटी होने के साथ ही बाघ के शरीर में कई घाव मिले हैं। पिछले हिस्से में बांई तरफ की खाल भी काटी गई है। पेट से तिल्ली गायब होने के साथ मूंछों के बाल भी कम पाए गए हैं।
डीएफओ का कहना है कि प्रारंभिक पड़ताल के बाद आशंका जताई जा रही है कि बाघ को फंदे में फंसाने के बाद धारदार हथियार से मारा गया और शव गैबुवा में फेंका दिया।
बताया कि बाघ की लंबाई 1 मीटर 97 सेंटीमीटर, ऊंचाई डेढ़ मीटर और उम्र छह से सात साल के बीच आंकी गई है। ठीक एक साल पहले 18 अप्रैल 2013 को भी इसी हालात में दाबका नदी में एक बाघ का शव मिला था, जिसकी मौत के कारणों का आज तक विभाग खुलासा नहीं कर पाया है।