भोजन व आवास की कमी है मुख्य कारक: डाॅ. बिष्ट
गढ़वाल विवि में जीव विज्ञान विभाग के एचओडी व पक्षी विशेषज्ञ प्रो. एमएस बिष्ट का कहना है कि पहाड़ से कौवा लगभग विलुप्त हो गया है। जिसके पीछे भोजन व आवास की कमी मुख्य कारक हैं। कहा, कौवा वैसे तो सर्वहारा है, लेकिन कीड़े मकोड़े उसका प्रिय भोजन हैं। पहाड़ों में हो रहे पलायन, खेती के बंजर होने, पशुपालन नहीं होने, विदेशी खर-पतवार के फैलने और फसल चक्र टूटने से कौवों को खाना नहीं मिल पा रहा है। जबकि पहाड़ में घास के परखुंड, कई प्रजाति के पेड़ों के नहीं होने से अब उन्हें घौंसला बनाना आसान नहीं रह गया है।
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पहाड़ में दो प्रजाति के रहते हैं कौवे
प्रो. बिष्ट ने बताया कि पहाड़ में दो प्रजाति के कौवे मुख्य रूप से पाए जाते थे। इनमें घरेलू व जंगली कौवा था। घरेलू कौवे का गला स्लेटी होता है। जबकि जंगली पूरा काला होता है। वह घरेलू से आकार में बड़ा भी होता है।
पारिस्थिति तंत्र होगा प्रभावित
प्रो. एमएस बिष्ट ने कहा कि पक्षी हर जलवायु में स्वयं को ढालने में माहिर होते हैं। लेकिन पहाड़ों से कौवों का विलुप्त होना पारिस्थिति तंत्र को प्रभावित करेगा। इसका दुष्प्रभाव दशकों बाद देखने को मिलेंगे।