पूर्व क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर के मित्र उद्योगपति संजय नारंग के आलीशान बंगले ढहलिया बैंक का कुछ हिस्सा ढहाया जा सकता है।
बंगले का गेट समेत यह हिस्सा रक्षा मंत्रालय से जुड़े प्रौद्योगिकी प्रबंध संस्थान की 50 मीटर दूरी की जद में है। मसूरी स्थित लंढौर छावनी परिषद इस हिस्से को पहले ही अवैध करार दे चुकी है। अब सुप्रीम कोर्ट ने भी इसे अवैध माना है।
बंगला संजय नारंग के नाम पर
बताया जा रहा है कि बंगला संजय नारंग ने सचिन तेंदुलकर के लिए बनवाया है। बीते दिसंबर माह में मसूरी आए सचिन परिवार सहित इसी में कई दिन रहे थे। हालांकि बंगला संजय नारंग के नाम पर है।
लाल टिब्बा क्षेत्र में बना बंगला निर्माण के साथ ही विवादों में आ गया था। बंगले के पास प्रौद्योगिकी प्रबंध संस्थान है। इससे करीब 50 मीटर दूरी तक किसी भी प्रकार का निर्माण प्रतिबंधित है। लेकिन ढहलिया बैंक का गेट और कुछ हिस्सा संस्थान की सीमा से सटा है। इसी आधार पर लंढौर छावनी परिषद ने इस हिस्से को अवैध करार दिया था।
संजय नारंग ने इसके खिलाफ नैनीताल हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय बैंच ने फैसला दिया कि रक्षा मंत्रालय के किसी भी प्रतिष्ठान के 50 मीटर की दूरी तक किसी भी प्रकार का निर्माण अवैध माना जाएगा। वहीं, नैनीताल हाईकोर्ट में मामला लंबित बताया जा रहा है।
कब क्या हुआ
ढहलिया बैंक का निर्माण वर्ष 2013 में शुरू हुआ था।
इसके कुछ दिन बाद ही छावनी परिषद ने नोटिस जारी किया कि कुछ निर्माण अवैध है।
संजय नारंग ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की, जहां से 2014 में उन्हें स्टे मिल गया।
इसी दौरान उन्होंने सुप्रीम कोर्ट भी मामले से संबंधित याचिका दायर की।
दिसंबर 2014 में ढहलिया बैंक बनकर तैयार हुआ।
छावनी परिषद के सीईओ अजीत बी रेड्डी का कहना है कि नैनीताल हाईकोर्ट में लंबित मामले पर छावनी परिषद हाईकोर्ट को सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से अवगत कराएगी। हाईकोर्ट से निर्णय आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।