कानून के जानकारों का कहना है कि देहरादून नारी निकेतन में मानसिक रूप से विक्षिप्त संवासिनियों का रखा जाना गैर कानूनी है। कायदे से उनका मेंटल अस्पताल में इलाज किया जाना चाहिए।
ठीक होने के बाद ही उन्हें नारी निकेतन भेजा जाना चाहिए। जबकि दून के नारी निकेतन में रह रही 134 में से 102 संवासिनियां मानसिक रूप से बीमार बताई जाती हैं। नारी निकेतन में सही तरीके से देखभाल नहीं होने की वजह से यह बीमार हो जाती हैं। इनकी बीमारी का असर दूसरी संवासिनियों पर भी पड़ता है।
वरिष्ठ अधिवक्ता चंद्रशेखर तिवारी कहते हैं कि विक्षिप्त महिलाओं को केवल विधिक प्रक्रिया के अनुसार मेंटल अस्पताल में उचित चिकित्सकीय देखरेख में रखा जा सकता है। उनके पूरी तरह से ठीक नहीं होने तक उन्हें नारी निकेतन में नहीं भेजा जा सकता।
यदि नारी निकेतन में विक्षिप्त संवासिनियां हैं तो उनका यहां रखा जाना गैर कानूनी है। वही, समाधान संस्था की अध्यक्ष एवं वकील रेणु डी सिंह का कहना है कि नारी निकेतन में 70 फीसदी से अधिक संवासिनियां विक्षिप्त हैं, जिन्हें गैर कानूनी तरीके से रखा गया है। रेणु डी सिंह का आरोप है कि नारी निकेतन में संवासिनियों को बिना डाक्टरों की सलाह के नींद की गोलियां दी जा रही हैं।
इससे उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। उनका आरोप है कि शोर कम करने के लिए संवासिनियों को नींद की गोलियां दी जाती हैं। उनका यह भी आरोप है कि नारी निकेतन के पास संवासिनियों को कितनी नींद की गोलियां दी गईं इसका कोई रिकार्ड नहीं है।
रेणु डी सिंह का कहना है कि नारी निकेतन में आने के समय सामान्य बाद में असामान्य होने वाली संवासिनियों के मामले की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि संवासिनियों के साथ नारी निकेतन में ऐसा क्या व्यवहार किया जाता है कि वह बाद में असामान्य हो जाती हैं?
यह है हाल
कुल संवासिनी - 134
मानसिक बीमार एवं मूक बधिर - 102
सामान्य हालत में - 32
विक्षिप्त संवासिनियों को लंबे उपचार की आवश्यकता होती है। मेंटल अस्पताल में प्रारंभिक उपचार के बाद इन्हें डॉक्टर की सलाह और मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट से अनुमति लेने के बाद नारी निकेतन भेजा जाता है। नारी निकेतन में विक्षिप्त और सामान्य संवासिनियों को अलग-अलग वार्ड में रखा गया है।
- ललित नारायण मिश्रा, सिटी मजिस्ट्रेट देहरादून
नींद की गोली के अधिक सेवन से व्यक्ति को सांस लेने में दिक्कत, डिप्रेशन और कोमा में जाने की नौबत आ सकती है।
- डॉ. महावीर सिंह, विरिष्ठ फिजिशियन दून अस्पताल