उत्तराखंड में होने वाले लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी अपने लिए संभावनाएं देख रही है। लोकसभा चुनाव में इस बार पार्टी अपने बड़े लीडर्स की जनसभाएं और रैली कराने की तैयारी में हैं।
उत्तराखंड आने की संभावना
इसी सिलसिले में पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव की अगले महीने उत्तराखंड आने की संभावना जताई जा रही है। उत्तराखंड गठन के बाद हरिद्वार लोकसभा सीट पर एक बार सपा का कब्जा रह चुका है। उसके बाद से सपा कोई भी चुनाव नहीं जीत सकी। उसे सामाजिक समीकरणों का खेल कहें अथवा महज इत्तेफाक भी मान सकते हैं।
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मगर, अब सपा पूरी तैयारी के साथ लोकसभा चुनाव में उतरने जा रही है। इस बार पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष समेत यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव तक की जनसभाएं और रैली आयोजित कराने की तैयारी की जा रही है। नवंबर से दिसंबर के मध्य इसी सिलसिले में पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव की उत्तराखंड आने की भी संभावना जताई जा रही है।
राष्ट्रीय अधिवेशन हरिद्वार में
सपा का विश्वास इसलिए भी बढ़ा है कि इस बार निकाय चुनाव में उसके अपने और समर्थित दल के प्रत्याशियों की कई सीटों पर जीत हुई है। इसी के मद्देनजर ही सपा अपना राष्ट्रीय अधिवेशन भी हरिद्वार में करने का फैसला ले चुकी थी। परंतु आपदा के चलते ऐन वक्त पर टाल कर आगरा ले गई।
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सपा के वरिष्ठ नेता विनोद बड़थ्वाल के मुताबिक लोकसभा चुनाव के मद्देनजर सपा की एक अहम बैठक 30 अक्तूबर को दिल्ली में होनी है।
उनकी तरफ से कोशिश होगी कि इस बार चुनाव मैदान में उतरने से पहले पार्टी के मुखिया देहरादून पहुंच कर चुनाव अभियान की शुरुआत करें। उन्होंने बताया कि अखिलेश यादव को भी उत्तराखंड सपा इकाई की ओर से आमंत्रित किया गया है।
उन्होंने कहा कि इस बार केंद्र में तीसरे मोर्चे की सरकार की पूरी संभावना है। उत्तराखंड भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कांग्रेस और भाजपा की सरकारों से लोग त्रस्त हो चुके हैं। अब विकल्प तलाश रहे हैं।
सरकार श्वेतपत्र जारी करे
सपा के वरिष्ठ नेता विनोद बड़थ्वाल ने रविवार को प्रेस कांफ्रेंस में प्रदेश सरकार से आपदा पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की। उन्होंने कहा कि प्रदेश ही नहीं देश की जनता जानना चाहती है कि जून में आई आपदा के बाद से प्रदेश सरकार ने अब तक क्या-क्या किया। कितने गांव प्रभावित हैं, पुल टूटे, कितनी सड़कें क्षतिग्रस्त हुईं।
राहत और आपदा प्रबंधन के लिए सरकार ने अब तक क्या घोषणाएं की और कितना काम पूरा कर लिया है, यह जनता को पता चलना चाहिए। उन्होंने सरकार से मांग की कि अधिकारियों को आपदा प्रभावित क्षेत्रों भेजे ताकि हालात का जायजा लेकर उसी के अनुरूप योजनाएं तैयार करें।
उन्होंने सरकार के राज्य एकता परिषद गठन को सराहनीय कदम बताया, लेकिन इस बात की भी आशंका जताई कि कहीं नेपथ्य में जा चुके कांग्रेसी नेताओं को उपकृत करने के लिए सरकार इस परिषद का उपयोग न करने लगे।
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