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छूट असली नहीं है, ये है सेल के पीछे का खेल

Wed, 18 Feb 2015 11:47 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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राजधानी देहरादून के सालावाला निवासी विक्रम बाजार में स्वेटर खरीदने निकले तो एक दुकान पर 50 फीसदी छूट का आफर भा गया। उन्होंने 760 रुपये एमआरपी वाला स्वेटर 380 रुपये में खरीद लिया।
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घर आकर स्वेटर पहन लिया और स्टिकर बच्चे को खेलने को दे दिया। खेलते समय बच्चे से स्टिकर उधड़ गया। इसी बीच विक्रम की नजर स्टिकर पर पड़ी तो देखा उसके नीचे एक और स्टिकर लगा है। जिस पर स्वेटर की एमआरपी 380 रुपये थी। दरअसल, छूट के नाम पर स्टिकर के ऊपर 760 रुपये का नया स्टिकर लगाकर ग्राहक को भ्रमित किया गया था।  

विक्रम तो बानगी भर हैं। छूट में लूट का यह सिलसिला बदस्तूर चल रहा है। बचा हुआ स्टाक निकालने के नाम पर ग्राहक खूब ठगे जा रहे हैं। सेल का यह खेल अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) बदले जाने तक ही सीमित नहीं है, मैन्युफैक्चरिंग डेट तक बदली जा रही है।
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ग्राहकों को ठगा जा रहा है

साल 2013 में निर्मित स्वेटर वर्ष 2014 की स्लिप लगाकर बेचे जा रहे हैं। इन्हें वर्तमान स्टाक का दर्शाकर ग्राहकों को ठगा जा रहा है। स्थानीय ही नहीं, कई स्थापित ब्रांड तक  इस खेल में शामिल हैं। सेल के खेल में खपने वाला ज्यादातर माल लुधियाना और पानीपत जैसी जगहों का है।

पुराने पर नया स्टिकर लगाने की बात सामने आती रही है। सेल के नाम पर कई व्यापारी ग्राहकों से अधिक पैसे वसूलते हैं। इससे दूसरे व्यापारियों का नाम खराब होता है।
-प्रतीक, दुकानदार समिति, पलटन बाजार

यहां करें शिकायत
रेडीमेड गार्मेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अमरजीत आनंद का कहना है कि यदि किसी ग्राहक के साथ धोखा हुआ है तो वह इस मोबाइल नंबर-9837003604 पर शिकायत कर सकता है।

यह सावधानी बरतें
कपड़ा कमेटी के उपाध्यक्ष अंशुमान गुप्ता का कहना है कि लोगों को जान पहचान की दुकान से ही सामान खरीदना चाहिए। ठगे जाने पर ग्राहक को चुप नहीं बैठना चाहिए। एसोसिएशन के पास शिकायत करें। यदि यहां भी बात न बने तो उपभोक्ता फोरम में शिकायत करें।
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