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'गंगा शुद्घिकरण', क्या बकवास है?

Tue, 08 Oct 2013 11:33 AM IST
अमर उजाला, हरिद्वार
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हरिद्वार में धर्माचार्यों ने गंगा जल की शुद्धिकरण के लिए लगाई गई मशीन को उखाड़ फेंका। मंगलवार को राज्यपाल अजीज कुरैशी इसका उद्घाटन करने वाले थे।
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हरिद्वार में ऐसी 13 मशीनें लगाने की योजना थी। गंगा सभा एवं हरिद्वार के धर्माचार्यों के जबर्दस्त विरोध के चलते यह कार्यक्रम रद हो गया है।

करीब एक सप्ताह पूर्व परमार्थ निकेतन ऋषिकेश के कार्यक्रम क्रियान्वयन निदेशक राम महेश मिश्र ने मुनि चिदानंद की ओर से एक पत्र गंगा सभा को देकर मशीनें लगाने की अनुमति मांगी थी।

गंगा सभा ने अनुमति देने से किया इंकार
हरिद्वार नगर निगम से भी अनुमति ली गई थी। फिक्की और वाटर लाइफ एसोसिएशन के सहयोग से चिदानंद मुनि का गंगा एक्शन परिवार हरिद्वार में मशीनें लगाने जा रहा था। इनके जरिए गंगा जल फिल्टर होकर आता। गंगा सभा ने अनुमति देने से इंकार कर दिया।
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सभा का तर्क है कि गंगाजल तो स्वयं शुद्ध है। मशीनें लगेंगी तो यह माना जाएगा कि गंगा जल अशुद्ध हो गया है। करोड़ों धर्मावलंबी मूल गंगा जल को ही पवित्र मानते हैं।

कहीं भी नहीं लगने देंगे मशीनें
तीर्थ पुरोहितों ने घोषणा की है कि हरकी पैड़ी ही नहीं, गंगा में कहीं भी गंगाजल फिल्टर मशीनें नहीं लगने दी जाएंगी। पुरोहितों ने आरोप लगाया कि गंगाजल की महिमा घटाने के लिए परमार्थ निकेतन ने यह कुत्सित प्रयास किया था, जिसे नाकामयाब कर दिया गया।
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एक बहुहस्ताक्षरित वक्तव्य में सौरभ शिवपुरी, नवीन गौतम, प्रवीण त्रिपाठी, नितिन गौतम, रामकुमार मिश्रा, आशुतोष शर्मा, संजय मारवाड़ी, राकेश पचभैया, अंकुर पालीवाल, सिद्धार्थ त्रिपाठी आदि ने चेतावनी दी है कि यदि गंगा एक्शन परिवार ने भविष्य में कभी दोबारा मशीनें लगाने का प्रयास किया तो व्यापक विरोध होगा। उन्होंने आग्रह किया कि मशीनें लगानी है तो किसी और नदी में लगाई जाएं।

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