उत्तराखंड की वादियां भले ही सूनी पड़ी हों लेकिन राष्ट्रीय राजाजी पार्क की सफारी सैलानियों को खूब भा रही है।
पांच लाख बत्तीस हजार आठ से पांच रुपए का राजस्व
एक महीने में दो हजार से अधिक लोगों ने पार्क के जानवरों का दीदार करने के लिए सफारी का मजा लिया। पार्क प्रशासन को अभी तक पांच लाख बत्तीस हजार आठ से पांच रुपए का राजस्व प्राप्त हो चुका है। राजाजी पार्क सैलानियों के लिए 15 नंवबर को खोल दिए गए थे।
मौसम सुहावना होने से सैलानियों के संख्या में तेजी से इजाफा होता जा रहा है। पार्क में वन सफारी के दौरान हाथी, चीतल, हिरण, भालू, गुलदार आदि के साथ प्रकृति के अनुपम दृश्यों के गवाह बनने के चाह में देश-विदेश से बड़ी सख्या में सैलानी हरिद्वार से सटे 14829.8 हेक्टेयर में फैले चीला वन रेंज में पहुंच रहे है।
वन सफारी का मजा ले रहे सैलानी
रेंजर डीपी उनियाल ने बताया कि मौसम अच्छा होने से सैलानियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि एक महीने में दो हजार एक चौहत्तर भारतीय और एक सौ चौरासी विदेश सैलानियों समेत कुल दो हजार तीन सौ अट्ठावन सैलानी वन सफारी का मजा ले चुके है।
जिससे चीला वन रेंज से पार्क प्रशासन को एक महीने में पांच लाख बत्तीस हजार आठ सौ पांच रुपये का राजस्व प्राप्त हो चुका है।
सूनी पड़ी झीलमिल झील
श्यामपुर क्षेत्र के रसियावड़ वन रेंज में 148 हेक्टेयर में फैली झीलमिल झील सरकार और वन विभाग की उदासीनता का दंश झेल रही है। सैलानियों के अभाव में झील सूनी पड़ी हुई है।
सुविधाओं की भारी कमी होने के कारण सैलानी झील में सफारी के लिए नहीं पहुंच रहे है। पिछले एक महीने में झील में सफारी के लिए अब तक सौ से भी कम लोग सफारी का आनंद लेने पहुंचे।
यह आलम तब है जबकि झीलमिल झील उत्तराखंड में बारहसिंघों का एकमात्र बसेरा है। 200 से भी ज्यादा बारहसिंघे और सुरखाब जैसे पक्षी फिलहाल झील के आसपास देखे जा सकते हैं।
वहीं प्रभागीय वनाधिकारी एमबी सिंह का कहना है कि बजट नहीं आने के कारण सैलानियों को राजाजी पार्क की जैसी सुविधा मुहैया नहीं हो पा रही है। जिससे सैलानियों की सख्या में इजाफा नहीं हो पा रहा है।