मातृसदन में दो संत गंगा की रक्षा के लिए अनशन करते हुए अपने प्राणों का बलिदान दे चुके हैं। वर्ष 2011 में ब्रह्मचारी निगमांनद ने गंगा में अवैध खनन बंद करने की मांग को लेकर अनशन किया था। बाद में उनका देहावसान हो गया था।
इसी तरह वर्ष 2018 में जाने-माने वैज्ञानिक रहे स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद उर्फ जीडी अग्रवाल ने भी गंगा की रक्षा के लिए अनशन करते हुए अपने प्राणों का बलिदान किया था। गंगा रक्षा के लिए मातृसदन के संतो के बलिदान पर संयुक्त राष्ट्र संघ यूएनओ ने भी हस्तक्षेप किया।
स्वामी शिवानंद सरस्वती ने बताया कि यूएनओ की ओर से सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम कहा गया कि गंगा को लेकर अब और बलिदान नहीं। स्वामी शिवानंद सरस्वती ने बताया कि मातृसदन में हुए दोनों बलिदानों पर संज्ञान लेते हुए यूएनओ की तरफ से उनकी वेबसाइट पर टिप्पणी की गई है।