मातृ सदन की अनुयायी साध्वी पद्मावती ने गंगा रक्षा के लिए 15 दिसंबर को आमरण अनशन शुरू किया था। 30 जनवरी को प्रशासन ने साध्वी पद्मावती को जबरन उठाकर देहरादून के दून अस्पताल में भर्ती करा दिया था। उसी दिन ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद ने आमरण अनशन शुरू कर किया।
19 फरवरी को पुलिस प्रशासन ने मातृ सदन से सुरक्षा के लिए तैनात पुलिसकर्मियों को हटा दिया था। इसके विरोध में ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद ने जल भी त्याग दिया था। इसके बाद लगातार उनकी हालत बिगड़ती जा रही थी। एसडीएम कुश्म चौहान, सीओ सिटी अभय प्रताप सिंह और जिला अस्पताल के डॉक्टरों की टीम मातृ सदन पहुंची।
डॉक्टरों ने उनका स्वास्थ्य परीक्षण किया और गिरते स्वास्थ्य को देखते हुए अस्पताल में भर्ती करने की सलाह दी। प्रशासनिक अधिकारियों ने ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद से आग्रह किया कि वे आमरण अनशन समाप्त कर दें। मातृ सदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवांनद सरस्वती को भी उन्हें मनाने के लिए आग्रह किया गया।
स्वामी शिवानंद सरस्वती ने कहा कि वे अपने किसी भी ब्रह्मचारी और साध्वी का इलाज उत्तराखंड के किसी भी अस्पताल में नहीं कराएंगे। आखिर चार घंटे बाद दोपहर करीब ढाई बजे आत्मबोधानंद को एम्स दिल्ली ले जाने पर सहमति बनी और प्रशासन की टीम आत्मबोधानंद को लेकर दिल्ली के लिए रवाना हुई।