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Russia ukraine war: घर लौटे छात्रों की आंखों में जंग का मंजर अभी भी डरा रहा, आज कुछ और की वतन वापसी का इंतजार

Sat, 05 Mar 2022 03:05 PM IST
रेनू सकलानी न्यजू डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

यूक्रेन में फंसे कई छात्र अपने घर लौट चुके हैं। बच्चों की सकुशल घर वापसी हुई तो परिजनों ने राहत की सांस ली, लेकिन वहीं छात्रों में जंग के खौफनाक मंजर का डर बना हुआ। जिसे उन्होंने अपनी आंखों से देखा है। 
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यूक्रेन से लौटे आयुष और रजत असवाल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई के लिए गए पौड़ी जिले के कोटद्वार और समीपवर्ती क्षेेेत्रों के छात्र-छात्राओं के लौटने का सिलसिला जारी है। शुक्रवार को रतनपुर कुंभीचौड़ निवासी रजत असवाल, देवीरोड डबराल कालोनी निवासी जयेश रावत और तड़ियाल चौक निवासी आयुष कुकरेती सकुशल अपने घर लौट आए हैं।

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जबकि कोटद्वार की दो छात्राएं शिवानी शर्मा और आंचल नैथानी भी दिल्ली पहुंच गई हैं। अन्य कई छात्र शुक्रवार शाम को रोमानियां और हंगरी से मुंबई और दिल्ली के लिए रवाना होंगे, जिनके शनिवार तक कोटद्वार पहुंचने की संभावनाएं हैं। घर पहुंचने पर परिजनों ने राहत की सांस ली है। 

बस बदलकर रोमानिया बार्डर पहुंचने का प्रयास कर रहे
यूक्रेन में भीषण युद्ध के बीच फंसे इन छात्र-छात्राओं का लगातार अपने घर वालों से संपर्क बना रहा। सभी अपने परिजनों से वहां के विकट हालात के बारे में बताते रहे। कई छात्र-छात्राओं को कई किमी पैदल चलकर बस और ट्रेन मिल पाई, वहीं खारकीव मेें फंसे अनुराग पंवार अपने साथियों के साथ बस बदलकर रोमानिया बार्डर पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं।
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ये भी पढ़ें...रूस-यूक्रेन युद्ध: जंंग के बीच अभी फंसे हुए हैं उत्तराखंड के 50 छात्र, देहरादून जिले के सबसे अधिक

यूक्रेन से लौटकर ये छात्र-छात्राएं परिजनों को अपने कटु अनुभव सुना रहे हैं। ज्यादातर परिजनों ने अपने बच्चों के कुशलपूर्वक लौटने की मन्नत सिद्धबाबा से मांगी थी। वे सभी बच्चों के संग जल्द बाबा के चरणों में सिर नवाकर प्रसाद चढ़ाने की बात कर रहे हैं। 

15 किमी पैदल और टैक्सी से पहुंचे रोमानिया बार्डर 
कोटद्वार पहुंचने पर रतनुपर कुंभीचौड़ निवासी पूर्व प्रमुख सुरेश असवाल के बेटे रजत असवाल के सकुशल अपने घर पहुंचने पर परिजनों, नातेदारों और क्षेत्रवासियों ने स्वागत किया। यूक्रेन के इवानोफ्रेक्विस नेशनल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस के तृतीय वर्ष के छात्र रजत असवाल ने घर पहुंचने पर आप बीती सुनाई। कहा कि युद्ध के कारण वहां के हालात बहुत भयावह बने हैं।

लगातार हो रहे बम धमाकों से वहां रह रहे विदेशी और यू्क्रेनवासियों में भय का वातावरण बना हुआ है। ज्यादातर विदेशी लौट चुके हैं, लेकिन जो किन्हीं कारणों से नहीं निकल पाए, वे बहुत डरे हुए हैं। रजत बताते हैं कि 24 फरवरी को यूक्रेन के यूवानों एयरपोर्ट पर बम धमाका हुआ था, जिसके बाद से ही वहां रह रहे भारतीय छात्रों में दहशत का माहौल बन गया था। वह खुद 15 किमी पैदल चलकर और कुछ किमी टैक्सी बुक कराकर किसी तरह रोमानिया बार्डर पहुंचे थे।

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श्रीनगर का रोहित रोमानिया से पहुंचा देहरादून, एक अन्य हंगरी में फंसा

श्रीनगर का युवा रोहित वर्मा यूक्रेन से रोमानिया के रास्ते भारत पहुंचा और शुक्रवार शाम को वह देहरादून पहुंच गया। वतन पहुंचने पर उसने केंद्र सरकार का शुक्रिया अदा किया है। वहीं एक अन्य युवक मृणाल अभी हंगरी में ही फंसा हुआ है। एक-दो दिन मेें उसके भारत आने की उम्मीद है।

श्रीनगर के निरजंनी बाग निवासी रोहित वर्मा यूक्रेन के चेर्नवित्सी शहर में स्थित बुकावियन मेडिकल कॉलेज और श्रीकोट निवासी मृणाल भट्ट उजरो यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस कर रहे हैं। रोहित 27 फरवरी को यूक्रेन से रोमानिया पहुंच गया था। इस बीच वह शेल्टर हाउस में अन्य छात्रों के साथ रहा। यहां भारत के केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से उनकी मुलाकात भी हुई।

उत्तराखंड के पांच अन्य छात्रों के साथ देहरादून पहुंचा श्रीनगर का रोहित
रोहित ने बताया कि गुरुवार को उनको बस से एअरपोर्ट ले जाया गया। जहां से शाम सवा सात बजे वह हवाई जहाज से भारत के लिए निकले। शुक्रवार सुबह लगभग आठ बजे वह दिल्ली पहुंच गए। इसके बाद उनको गेस्टहाउस में ठहराया गया। दोपहर बाद वह उत्तराखंड के पांच अन्य छात्रों के साथ देहरादून पहुंच गया।

रोहित ने बताया कि शेल्टर हाउस से यहां पहुंचने तक उसे कोई दिक्कत नहीं हुई। सरकार की ओर से सभी व्यवस्थाएं की गईं। वहीं, मृणाल दो दिन से हंगरी से भारत आने की प्रतीक्षा कर रहा है। मृणाल के फुफेरे भाई भास्कर नौटियाल ने बताया कि मृणाल ने जल्दी भारत आने की बात कही है।

यूक्रेन से चार एमबीबीएस छात्र-छात्राएं पहुंचे घर
यूक्रेन में फंसे टिहरी जिले के चार छात्र-छात्राएं शुक्रवार को अपने परिजनों के घर पहुंच गए हैं। जबकि होटल में काम करने वाले चार युवक भी शनिवार तक दिल्ली पहुंच जाएंगे। उनको फ्लाइट का टोकन मिल चुका है। वह देर रात या सुबह रोमानिया कैंप से स्वदेश के लिए रवाना होंगे, लेकिन अभी भी करीब 15 लोग यूक्रेन से निकलकर अन्य शहरों में बनाए गए कैंपों में रह रहे हैं। परिजन उनकी जल्द घर वापसी की टकटकी लगाए हुए हैं। 

यूक्रेन से रोमानिया, हंगरी, पोलैंड बॉर्डर पहुंचे टिहरी जिले के लोगों का स्वदेश वापस लौटने का सिलसिला जारी है। शुक्रवार को बौराड़ी के निवासी राजपाल राणा का बेटा मनीष राणा ऋषिकेश स्थित अपने दादा, दादी के घर पहुंच गया है। मनीष शनिवार को टिहरी पहुंचेगा। बौराड़ी निवासी सौम्य राणा, सिद्धि तोपवाल, विद्धिश चौहान भी देहरादून, मुनिकरेती शीशमझाड़ी निवासी मो. आबिद घर लौट गए हैं।
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