उन्होंने बताया कि दुर्लभ प्रजाति की यह चिड़िया पिछले 132 सालों में उत्तराखंड में कभी नहीं देखी गई। उन्होंने बताया कि इस चिड़िया को दुनिया भर में 536 बार देखा गया था। भारत में केवल लद्दाख और हिमाचल प्रदेश में ही 22 बार यह पक्षी देखा गया है।
यह पहला मौका है जब उत्तराखंड में यह पक्षी नजर आया है। ट्रैकिंग टीम में जगदीश नेगी, बची डंगवाल, विजय दीक्षित रेड्डी, बबीता गलिया, जेनीफर, गोपाल नायल, हरीश गौड़, कमल बिष्ट भी शामिल थे।
इसकी पहचान है कि इसके पीठ और पंखों पर व्यापक सफेद रेखा, सिर पर चांदी या चमकीला स्लेटी टोपी जैसा नजर आता है। यह पक्षी पेड़ से जमीन की तरफ तेजी से उड़ान भरता है और फिर उसी स्थान पर वापस आ जाता है।