प्रवासियों के गांव वापसी को बताया सुखद
हिमानी ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड के अधिकांश गांव पलायन की मार झेल रहे हैं। भले ही सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। लेकिनअब भी कई गांव मूलभूत सुविधाओं से नहीं जुड़ पाए हैं। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों से प्रवासी ग्रामीण अपने पैतृक गांवों को लोट रहे हैं, जो सुखद है।
पहाड़ी पहली महिला थी, जिसने फिल्म में काम किया
हिमानीने बताया कि वर्ष 1984-85 में वह फिल्म इंडस्ट्री में काम करने वाली पहाड़ की पहली महिला थी। तब, काफी संघर्ष भी था। अपने लोगों के सहयोग और आशीर्वाद से ही फिल्म क्षेत्र में सफल रही हूं। उन्होंने कहा कि आज के समय में सोशल मीडिया का दौर है, तब ऐसा नहीं था।
गढ़वाली समझती और बोलती हूं
मैं गढ़वाली गाने सुनने और गुनगुनाने का प्रयास करती हूं। मैंने गढ़वाली और कुमाऊंनी फिल्मों में काम किया है। मेरा प्रयास होता है कि मैं गढ़वाली में बात करूं। हमारा गढ़वाली सिनेमा मजबूत हो और गढ़वाली नाटकों को पहचान मिले।
मंथन के साथ निष्कर्ष भी हो
हिमानीने कहा कि सरकारें काम तो कर रही हैं, पर निष्कर्ष नहीं निकल रहा है। लोग अपनी आजीविका के लिए बाहर जाएं, पर अपनी जड़ों से जुड़े रहे। उन्होंने कहा कि सरकार गांवों को मूलभूत सुविधाओं से जोड़े, जिससे पलायन कम से कम हो।