एक अधिकारी के अड़ियल रवैये के कारण मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) और देहरादून विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण (साडा) की बोर्ड बैठक पिछले आठ माह से नहीं हुई।
इस मामले में शहरी विकास मंत्री प्रीतम सिंह पंवार के आदेश की भी अवहेलना की गई। जबकि नियमानुसार, हर तीन माह में बोर्ड बैठक होनी चाहिए। इस कारण शासन के आदेशों के अनुपालन के अलावा तमाम कामर्शियल निर्माण व विकास कार्य रुके हुए हैं।
मंत्री के आदेशों की धज्जियां
देहरादून में होने वाले तमाम विकास कार्य, बड़े व्यावसायिक निर्माण की अनुमति बोर्ड बैठक में मिलती है। बोर्ड के पदेन अध्यक्ष कमिश्नर गढ़वाल मंडल और सचिव एमडीडीए उपाध्यक्ष होते हैं। इसके अलावा बोर्ड के सदस्यों में प्राधिकरण के सचिव व अन्य अधिकारी भी होते हैं।
हर तीन माह में होने के अनिवार्य नियम के बावजूद बीते मार्च के बाद बोर्ड मीटिंग नहीं हुई। इस बीच दीपावली के बाद बोर्ड बैठना तय किया गया था। इसके लिए मंत्री प्रीतम सिंह ने भी गढ़वाल कमिश्नर को आदेश दिया था।
लेकिन उनके आदेश को भी तवज्जो नहीं दीगई। बाद में फिर शासन ने बैठक के आदेश जारी किए। इस पर एमडीडीए ने बोर्ड का एजेंडा और प्रस्ताव भी तैयार कर दिए लेकिन बोर्ड बैठक नहीं हुई। आदेशों की धज्जियां उड़ने के बाद मंत्री प्रीतम सिंह भी खफा हो गए।
सूत्रों के अनुसार मामले से मुख्यमंत्री हरीश रावत को जल्द ही अवगत कराया जाने वाला है। यद्यपि शहरी विकास मंत्री पंवार ने बताया कि गढ़वाल कमिश्नर को आदेश दिए गए हैं। उन्होंने तीन या चार दिन में बैठक होने की बात कही है।
दो सदस्यों के बीच अहं की लड़ाई
सूत्रों के अनुसार बैठक न होने के पीछे बोर्ड के दो सदस्यों के बीच विवाद है। अहं की इस लड़ाई के कारण एक अधिकारी बैठक के लिए समय नहीं दे रहे हैं। जबकि यही अधिकारी पिछले कुछ माह में अन्य विभागों की कई बैठक ले चुके हैं।