श्राद्घ के कारण संभागीय परिवहन कार्यालय के मुनाफा रुक गया था। लेकिन अब नवरात्र में वाहन सेक्टर में उछाल आने की उम्मीद की जा रही है।
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आरटीओ कार्यालय में हर माह नए वाहनों के रजिस्ट्रेशन में करोड़ों रुपयों की फीस जमा होती है। वहीं दो पहिया वाहनों में भी लाखों रुपया जुटता है। त्योहारी सीजन में यह आकंड़ा चार से पांच करोड़ रुपए तक बढ़ जाता है। लेकिन, श्राद्ध में धार्मिक मान्यताओं के कारण हिंदू लोग वाहन नहीं खरीदते। इससे राजस्व घट जाता है।
घाटा पाटने की कोशिश
हालांकि, नवरात्र शुरू होते ही आरटीओ में भी रजिस्ट्रेशन कराने वालों की लाइन लंबी हो जाएगी। अब आरटीओ अपने घाटे तो नवरात्र से पाटने की कोशिश करेगा। इसके लिए अधिकारियों के निर्देश पर रजिस्ट्रेशन के ज्यादा काउंटर भी लगाए जा सकते हैं।
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आरटीओ दिनेश चंद्र पठोई ने बताया त्यौहारी सीजन में लोग वाहन खरीदते है। इसमें सबसे ज्यादा दोपहिया होते हैं। श्राद्घ के कारण जो राजस्व में कमी आती है, उसमें दुबारा उछाल आ जाता है।
कितना जुटता है राजस्व रजिस्ट्रेशन से
(केवल प्राइवेट वाहन)
अगस्त में खरीदे गए दोपहिया - 2935
गस्त में खरीदे गए चार पहिया - 881
कुल रजिस्ट्रेशन फीस- आठ करोड़ 63 लाख, सात हजार 306 रुपए
सितंबर में खरीदे गए दोपहिया - 3376
सितंबर में खरीदे गए चार पहिया - 975
कुल फीस- तीन करोड़, 63 लाख, सात हजार, 983 रुपए
(सितंबर माह में नब्बे फीसदी राजस्व पहले बीस दिनों का है)
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