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RTO कार्यालय में सुधरेगी व्यवस्थाएं, नहीं लगेगी लंबी लाइन

Sat, 02 Apr 2016 12:55 PM IST
आशीष डोभाल/ अमर उजाला, देहरादून
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देहरादून स्थित आरटीओ में रोजाना सर्वर स्लो होने के कारण होने वाली परेशानी और लंबी लाइन में लगकर पसीना बहाने से आम जनता को जल्द निजात मिलने वाली है।
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आरटीओ कार्यालय में बीएसएनएल के सर्वर की जगह किसी निजी कंपनी का सर्वर लगवाया जाएगा। जबकि लाइन में लगने से निजात दिलाने को कार्यालय से आपको एक टोकन मिलेगा, टोकन लेकर आप आराम से वेटिंग रूम में बैठकर यातायात के नियमों पर आधारित डाक्यूमेंट्री देख सकेंगे। नंबर आने पर कार्यालय के कर्मचारी आपको बुला लेंगे। सर्वर बदलने और टोकन सिस्टम लागू करने को आरटीओ सुधांशु गर्ग ने एक प्रस्ताव बनाकर मुख्यालय भेजा है। उम्मीद है कि जल्द ही मुख्यालय से प्रस्ताव पर मुहर लग जाएगी।

बता दें कि आरटीओ देहरादून में वाहनों के टैक्स, फिटनेस फीस जमा करने, एनओसी लेने, डीएल बनाने समेत लगभग सभी
कार्य वाहन-4 में आनलाइन किये जा रहे हैं। एनआईसी की लापरवाही और बीएसएनएल का सर्वर स्लो होने के कारण लोगों को
आए दिन परेशानी उठानी पड़ती है। लंबी लाइन में घंटों तक लगने के बाद भी लोगों को वापस लौटना पड़ता है। जबकि सर्वर
की समस्या से कर्मचारी भी परेशान रहते है।

इस समस्या से आम जनता, ट्रांसपोर्टर और आम जनता को परेशान न होना पड़े, इसके लिए विभाग ने सर्वर बदलने और टोकन सिस्टम लागू करने की योजना बनाई है। आरटीओ सुधांशु गर्ग ने बताया कि दोनों के लिए प्रस्ताव बनाकर मुख्यालय भेज दिया गया है। जल्द ही वहां से अनुमति मिलने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि बैंक की तर्ज पर टोकन सिस्टम लागू होगा, लोगों के लिये वेटिंग रूम में बैठने की व्यवस्था की जा रही है। वहां पर रोड सेफ्टी की ऑडियो, वीडियो लगातार चलती रहेंगी।
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शुक्रवार को भी ठप रहा सर्वर 
बीएसएनएल का सर्वर शुक्रवार को ठप रहा। जिससे लोगों को तमाम परेशानी झेलनी पड़ी। उत्तरकाशी के राकेश सेमवाल, राजेंद्र सेमवाल, रवि रावत,  खालिद अहमद, बुजुर्ग प्रेम सिंह, खलीक अहमद, योगेंद्र, अमित, अनीस आदि का कहना है कि वे अपनी गाड़ी का टैक्स, फिटनेस की फीस और डीएल बनवाने तीन दिन से आ रहे है, लेकिन सर्वर की गड़बड़ी के कारण उनके काम नहीं हो पा रहे है।

धूप में लाइन में लगकर उनको वापस जाना पड़ता है। वहीं उनका कहना था कि बैंक में भी आनलाइन पैसा जमा नहीं हो पा रहा है। वहीं सुधीर गुप्ता ने आरटीओ में शिकायत कर बताया कि वे डेढ़ माह पहले अपने परिवार के साथ अपनी गाड़ी संख्या यूके 07 बीएम 3200  से दिल्ली गए थे। वहां चेकिंग के दौरान पुलिस ने गाड़ी का नंबर (7738299899) पर डाला तो गाड़ी का कोई रिकार्ड नहीं मिला।
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जिस पर उन्होंने कंप्यूटरीकृत आरसी को ही फर्जी करार दे दिया। उनका आरोप है कि विभाग जब समस्त दस्तावेज आनलाइन करने की बात कह रहा है, तो साल 2015 में पंजीकृत गाड़ी अब तक आनलाइन क्यों नहीं हुई। इस पर एआरटीओ प्रशासन संदीप सैनी से बात की गई, तो उनका कहना था कि वैसे तो सभी वाहनों के नंबर आनलाइन दर्ज है, लेकिन इस गाड़ी का नंबर कैसे दर्ज नहीं हुआ। इस संबंध में एनआईसी के अफसरों से वार्ता की जाएगी।
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